
Bilaspur: व्यवसायी दशरथ खंडेलवाल हत्याकांड में High Court ने पलटा फैसला, आरोपियों को आजीवन कारावास
निचली अदालत का बरी करने का आदेश रद्द, धारा 302 और 307 के तहत सजा
बिलासपुर। व्यवसायी और पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल के बड़े भाई दशरथ खंडेलवाल हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी. डी. गुरु की खंडपीठ ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 307 के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

घटना 2013 की, लूट की नीयत से की गई थी हत्या
यह वारदात 22 नवंबर 2013 की है। दोपहर के समय दो युवक लूट की मंशा से 36 मॉल के नजदीक स्थित खंडेलवाल परिवार के घर में घुस गए। उन्होंने दरवाजा खोलने वाली विमला देवी पर हमला कर दिया।
घर के मालिक दशरथ खंडेलवाल जब सामने के कमरे से बाहर आए और विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर चाकू से हमला कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने विमला देवी को भी घायल कर एक कमरे में बंद कर दिया और घर से घड़ी व मोबाइल लूटकर फरार हो गए।

सुराग से खुला राज, मीनाक्षी ट्रेडर्स से जुड़े थे आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ कि ये वही लोग हैं जो करीब एक साल पहले मीनाक्षी ट्रेडर्स से घर में चिमनी ठीक करने आए थे। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने दयालबंद निवासी विक्की उर्फ मनोहर सिंह पर नजर रखी।
पड़ताल में सामने आया कि उसने हाल ही में एक बुजुर्ग की हत्या करने की बात कही थी। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए दोनों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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