
Chhattisgarh : भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
15 अक्टूबर 2025
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में बड़ा मोड़ लाने वाले एक अहम मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। याचिका दुर्ग के भाजपा सांसद भूपेश बघेल के भतीजे विजय बघेल ने दाखिल की थी। यदि अदालत याचिका के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो भूपेश बघेल का पाटन विधानसभा से निर्वाचन रद्द हो सकता है, जो राज्य की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।

क्या है पूरा मामला?
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट पर भूपेश बघेल (कांग्रेस) और विजय बघेल (भाजपा) के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। भूपेश बघेल ने अपने भतीजे विजय बघेल को 19,723 मतों के अंतर से हराकर सीट जीती थी। चुनाव आयोग की आचार संहिता के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार बंद हो जाना चाहिए। दूसरे चरण के मतदान से पहले 15 नवंबर 2023 की शाम 5 बजे प्रचार समाप्त हो गया था। लेकिन विजय बघेल ने आरोप लगाया कि 16 नवंबर को भूपेश बघेल ने पाटन क्षेत्र में रैली और रोड शो आयोजित किया, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता, सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल थे। यह आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।
विजय बघेल ने अदालत में फोटो और वीडियो सबूत पेश किए, जिनमें भूपेश बघेल को रैली में भाषण देते और वोट मांगते दिखाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि भूपेश बघेल का निर्वाचन शून्य घोषित किया जाए और उन्हें अयोग्य करार दिया जाए। फ़िलहाल हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा हैं जो कि कभी भी आ सकता है।
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