
Chhattisgarh में मानसून की विदाई: 1206.4 मिमी औसत वर्षा, बस्तर में सबसे अधिक
रायपुर, 11 अक्टूबर 2025: मानसून सीजन के अंतिम चरण में पहुंचते हुए छत्तीसगढ़ ने अब तक औसतन 1206.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की है। यह आंकड़ा राज्य के कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पर्याप्त वर्षा से फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह वर्षा 1 जून से 10 अक्टूबर 2025 तक की अवधि में रिकॉर्ड की गई है। हालांकि, कुछ जिलों में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई, वहीं अन्य क्षेत्रों में कम वर्षा ने सूखे की आशंका पैदा की है।

प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा बस्तर जिले में 1626.4 मिमी दर्ज की गई, जो राज्य औसत से लगभग 35% अधिक है। वहीं, बेमेतरा जिले में सबसे कम 549.4 मिमी वर्षा हुई, जो औसत से करीब 55% नीचे है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस असमान वितरण के कारण बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से नदियां उफान पर हैं, जबकि बेमेतरा जैसे मैदानी इलाकों में सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता हो सकती है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी हल्की बौछारें जारी रहने की भविष्यवाणी की है, लेकिन मानसून की विदाई तय मानी जा रही है।

रायपुर संभाग: संतुलित वर्षा, औसत से थोड़ा अधिक
रायपुर संभाग, जो राज्य की राजधानी का केंद्र है, में वर्षा का वितरण अपेक्षाकृत संतुलित रहा। यहां औसत वर्षा 1158 मिमी के आसपास रही, जो कृषि गतिविधियों के लिए सकारात्मक है। प्रमुख जिलों में वर्षा की स्थिति निम्नानुसार है:
- रायपुर जिला: 1158.4 मिमी – शहर क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बनी रही, लेकिन जल निकासी प्रणाली ने इसे नियंत्रित रखा।
- बलौदाबाजार: 1000.5 मिमी – धान की फसल को लाभ, लेकिन अंतिम चरण में अतिवृष्टि से नुकसान की आशंका।
- गरियाबंद: 1226.4 मिमी – जंगलों वाले क्षेत्र में अच्छी वर्षा से वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा।
- महासमुंद: 1050.4 मिमी – नदी तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बरती गई।
- धमतरी: 1147.2 मिमी – औसत से ऊपर, लेकिन बाढ़ प्रबंधन प्रभावी र
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