
Durg : सेंट्रल जेल में राज्य ज्योति महोत्सव का आयोजन: बंदियों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी और रक्तदान शिविर
छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में दुर्ग केंद्रीय जेल में ‘छत्तीसगढ़ राज्य ज्योति महोत्सव 2025-26’ का आयोजन किया गया। यह महोत्सव 3 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2025 तक जेल परिसर में मनाया गया, जिसमें विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। महोत्सव के दौरान आस्था मुग्धि केंद्र में बंदियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और उपयोगी वस्तुओं की प्रदर्शनी और बिक्री हुई। साथ ही, रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 16 अधिकारियों और कर्मचारियों ने रक्तदान किया।

महोत्सव का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह महोत्सव राज्य स्तर पर मनाया जा रहा है। दुर्ग जेल में यह आयोजन बंदियों के रचनात्मक कौशल को बढ़ावा देने और उन्हें समाज से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया। जेल प्रशासन का प्रयास है कि बंदी अपनी सजा के दौरान उपयोगी कौशल सीखें और आत्मनिर्भर बनें। इस महोत्सव के माध्यम से बंदियों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया गया, जो उनकी पुनर्वास प्रक्रिया का हिस्सा है।
प्रदर्शनी की मुख्य आकर्षण
महोत्सव के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में बंदियों द्वारा हाथ से बनाई गई विभिन्न कलाकृतियां और उपयोगी वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। इनमें लकड़ी से बने मंदिर, टी-टेबल, बेलन, छोटी और दोहली जैसी वस्तुएं प्रमुख थीं। इसके अलावा, बंदियों द्वारा तैयार किए गए 3डी पेन, अचार, एलईडी बल्ब, सरसों का तेल, टाट-पट्टी और चिकनकला (चिकनकारी) जैसे उत्पाद भी प्रदर्शनी का हिस्सा बने। ये वस्तुएं न केवल रचनात्मक थीं, बल्कि व्यावहारिक उपयोग की भी थीं। प्रदर्शनी में इन उत्पादों की बिक्री भी की गई, जिससे बंदियों को आर्थिक लाभ मिला और उनकी प्रेरणा बढ़ी।

रक्तदान शिविर का विवरण
महोत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रक्तदान शिविर रहा, जो राज्य ज्योति महोत्सव के तहत आयोजित किया गया। इस शिविर में जेल के 16 अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। रक्तदान करने वालों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जैसा कि कार्यक्रम की तस्वीरों में दिखाई देता है। यह शिविर जेल परिसर में ही आयोजित किया गया, जिसमें चिकित्सा टीम द्वारा सभी आवश्यक सावधानियां बरती गईं। रक्तदान के माध्यम से जेल प्रशासन ने सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया और बंदियों को भी ऐसे कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
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