
Relince पावर के CFO अशोक कुमार पाल गिरफ्तार: ED की फर्जी बैंक गारंटी मामले में कार्रवाई
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस पावर लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी 10 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में कई घंटों की पूछताछ के बाद हुई। पाल पर फर्जी बैंक गारंटी और फर्जी इनवॉइसिंग के माध्यम से धनराशि के हेरफेर का आरोप है, जो अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप (ADA ग्रुप) से जुड़ा हुआ है। ED के अनुसार, इस मामले में करीब 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी शामिल है, जो सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) टेंडर के लिए जमा की गई थी।

पाल, जो अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 11 अक्टूबर को सुबह 9:30 बजे विशेष PMLA अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ED उनकी हिरासत की मांग करेगा। यह ADA ग्रुप से जुड़े किसी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति की पहली गिरफ्तारी है।
क्या है पूरा मामला?
ED की जांच के अनुसार, अशोक कुमार पाल ने रिलायंस पावर की ओर से SECI को 68 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा की थी। यह गारंटी BESS टेंडर के लिए थी, जिसमें पाल को कंपनी के बोर्ड रेजोल्यूशन से दस्तावेजों को अंतिम रूप देने और जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि पाल ने फर्जी ट्रांसपोर्ट इनवॉइस को मंजूरी दी, जिससे कंपनी के फंड्स का डायवर्जन हुआ। इन इनवॉइस की राशि कई करोड़ रुपये थी और इन्हें रिलायंस पावर के आधिकारिक SAP और वेंडर मास्टर सिस्टम को बायपास करके टेलीग्राम तथा व्हाट्सऐप के माध्यम से मैनेज किया गया।

यह मामला व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जिसमें यस बैंक से लिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के लोन के हेरफेर की बात शामिल है। कुछ रिपोर्ट्स में कुल राशि को 17,000 करोड़ रुपये तक बताया गया है, जिसमें रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से 12,524 करोड़ रुपये के लोन बांटे गए, जो ज्यादातर अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों को दिए गए। ED का आरोप है कि पाल ने फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी देकर पैसे को गलत तरीके से ट्रांसफर किया, जिससे सार्वजनिक धन का नुकसान हुआ। रिलायंस पावर एक पब्लिकली लिस्टेड कंपनी है, जिसमें पब्लिक की 75% से अधिक हिस्सेदारी है, इसलिए यह धोखाधड़ी सार्वजनिक हितों को प्रभावित करती है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



