March 2, 2026
Collector बोले – ज्यादा होशियारी मत दिखाओ, Gariaband में तालाब पर कब्जे की शिकायत लेकर पहुँचे थे ग्रामीण

Collector बोले – ज्यादा होशियारी मत दिखाओ, Gariaband में तालाब पर कब्जे की शिकायत लेकर पहुँचे थे ग्रामीण

Oct 8, 2025

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में कलेक्टर भगवान सिंह उइके ग्रामीणों पर भड़क गए। ग्रामीण निस्तारी तालाब की समस्या को लेकर जनदर्शन में पहुंचे थे। कलेक्टर ने ग्रामीणों से कहा कि ‘कुछ भी बोलते हो, ज्यादा होशियारी मत दिखाओ समझे न, अनावश्यक बात करने से कोई मतलब नहीं है। जो है उसका सबूत पेश करो।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं अधिकारी ने कहा कि ग्रामीण बदसलूकी कर रहा था। गलत प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। यह मामला छुरा ब्लॉक के ग्राम सरकड़ा का है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के मालगुजार परिवार ने तालाब पर कब्जा कर एक हिस्से में हैचरी बना दी है। हैचरी (मछली पालन के लिए बनाई गई कृत्रिम जगह) की वजह से तालाब में पानी नहीं भर पा रहा है। बदबू के कारण संक्रमण का खतरा है। इस समस्या को लेकर ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।

3 हजार लोगों के लिए निस्तारी का एकमात्र स्रोत

इस मामले में सरपंच कृति लता दीवान, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष बाबूलाल साहू और अधिवक्ता दशरथ निषाद ने बताया कि तालाब 3 एकड़ में फैला है। यह तालाब 3 हजार आबादी वाली बस्ती के लिए निस्तारी (नहाने-कपड़ा धोने) का मुख्य स्रोत है। तालाब में पानी नहीं होने से बदबू फैल रही है और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

निस्तारी पर रोक के बाद ग्रामीणों ने खंगाले दस्तावेज

ग्रामीणों ने कहा कि कलेक्टर ऑफिस से खाली हाथ लौटना पड़ा है। अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव में आक्रोश पनपेगा। जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। गांव में मालगुजार के उत्तराधिकारियों की ओर से निस्तारी रोकने के बाद ग्रामीणों ने तालाब का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया।

1954 में बना था तालाब, रिकॉर्ड से हुई पुष्टि

अधिवक्ता दशरथ निषाद ने बताया कि निकाले गए गोस्वारा रिकॉर्ड के मुताबिक 1954 में तालाब निर्माण हुआ था। 1961 में जब सार्वजनिक स्थलों का सरकारीकरण किया जा रहा था। तभी ग्राम के सभी सार्वजनिक स्थलों को तत्कालीन मालगुजारों ने अपने नाम पर चढ़ा लिया।

1980 तक के रिकॉर्ड में जिस रकबे में तालाब का जिक्र था। वह अचानक 1981 में कृषि भूमि में तब्दील हो गया। जो तत्कालीन मालगुजार के वारिसों के नाम चढ़ गया। कृषि भूमि बताकर वारिसों ने तालाबों का भी बंटवारा कर लिया। मामला SDM न्यायालय में चल रहा है।

जानिए कलेक्टर ने क्या कहा?

इस मामले में कलेक्टर भगवान सिंह उईके से बात की। उन्होंने कहा कि कोई बदसलूकी नहीं हुई है। ये सब जानबूझकर किया जा रहा है। वह राजा लोगों का तालाब है। जिसमें मछली पालन किया गया है।

तालाब को ग्रामीणों के नाम किए जाने की मांग की जा रही है। किसी निजी स्वामित्व को कैसे किसी गांव के नाम पर कर सकते हैं। SDM खुद खड़ीं होकर बता रहीं थी, इसके बाद भी बदतमीजी कर रहा था। वायरल वीडियो पर उन्होंने कहा कि गलत प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

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