
Kanker: नवजात शिशु का शव खुले में फेंका, रात में कुत्तों ने नोचा; पुलिस ने शुरू की जांच
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक नवजात शिशु का शव खुले में फेंक दिया गया, जिसे रात के अंधेरे में आवारा कुत्तों ने नोच-खसोट लिया। स्थानीय लोगों ने सुबह इस भयावह दृश्य को देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह संदेह जताया जा रहा है कि यह अवैध गर्भपात या नवजात हत्या का मामला हो सकता है।

घटना का खुलासा: सुबह की भयानक तस्वीर
घटना कांकेर शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक सुनसान खेत में घटी। स्थानीय निवासी रामलाल साहू ने बताया कि वह सुबह करीब 6 बजे अपने खेत की ओर जा रहे थे, जब उन्हें खेत के किनारे पर एक छोटा सा शव नजर आया। नजदीक जाकर देखा तो पता चला कि यह एक नवजात शिशु का शव है, जिसके शरीर पर कुत्तों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। “रात भर कीचड़ और खून से सना शव देखकर मेरी रूह कांप गई। आसपास कुत्तों के पंजों के निशान थे, जो बताते हैं कि रात में उन्होंने इसे नोचा होगा,” साहू ने बताया।
गांव वालों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय थाने में दी। कुछ ही मिनटों में पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। शिशु के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत का सटीक कारण पता चल सके।
पुलिस की प्रारंभिक जांच: संदिग्धों पर नजर
कांकेर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच टीम गठित कर दी है। एसपी डॉ. अभिषेक मीणा ने बताया, “यह एक संवेदनशील मामला है। हम इलाके के सभी अस्पतालों और क्लीनिकों से अवैध गर्भपात के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। साथ ही, आसपास के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।” पुलिस को शक है कि शिशु को जन्म के तुरंत बाद फेंक दिया गया होगा, क्योंकि शव पर कोई कपड़े नहीं थे और न ही कोई चोट के निशान थे जो जन्म से पहले के हों।
पुलिस ने आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में छापेमारी शुरू कर दी है। ग्रामीणों के अनुसार, हाल ही में इलाके में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं, जहां एक महिला को गर्भवती अवस्था में देखा गया था। पुलिस इन सुरागों पर काम कर रही है।
सामाजिक प्रतिक्रिया: बेटी बचाओ का सवाल फिर खड़ा
यह घटना न केवल पुलिस के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक आईना है। स्थानीय महिला संगठनों ने इसे लिंग भेदभाव और अवैध गर्भपात की बढ़ती प्रवृत्ति का परिणाम बताया है। सामाजिक कार्यकर्ता मीरा वर्मा ने कहा, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं। सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।” जिला प्रशासन ने भी इस मामले में जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है।
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