
Durg यातायात पुलिस का Opretion सुरक्षा: सड़क दुर्घटनाओं पर सख्ती और जीवन रक्षा
दुर्ग, 07 अक्टूबर 2025: दुर्ग जिले की यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन को मजबूत करने के लिए ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ के अंतर्गत व्यापक अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत न केवल प्रमुख राजमार्गों पर दुर्घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, बल्कि स्कूल बसों की सुरक्षा जांच, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई और ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे मामलों में सख्ती बरती जा रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना है।

दुर्घटना में तत्परता से बचाई गई जान
कल रात, यानी 06 अक्टूबर 2025 को दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक युवक की कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह हादसा तेज गति और संभवतः लापरवाही के कारण हुआ, जिसमें युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर गश्त कर रहे यातायात पुलिस के जवानों ने तुरंत कार्रवाई की और घायल को अपनी गाड़ी से सुपेला शासकीय अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने युवक का प्राथमिक उपचार किया, जहां उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवक का नाम राहुल शर्मा (उम्र 28 वर्ष) है, जो रायपुर से दुर्ग की ओर जा रहा था। इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर तेज गति और सुरक्षा उपायों की अनदेखी के खतरों को उजागर किया है। यातायात पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल ने बताया, “हमारी टीम की तत्परता से एक जान बचाई जा सकी। यह ऑपरेशन सुरक्षा का हिस्सा है, जहां हम न केवल कार्रवाई करते हैं बल्कि आपात स्थिति में सहायता भी प्रदान करते हैं।”

स्कूल बसों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
ऑपरेशन सुरक्षा के तहत यातायात पुलिस ने जिले में संचालित सभी स्कूल बसों की व्यापक जांच शुरू की है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, पुलिस टीमों ने वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, फर्स्ट एड किट, आपातकालीन निकास द्वार, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर और ड्राइवरों के लाइसेंस की विस्तृत जांच की। अब तक 50 से अधिक स्कूल बसों की जांच की जा चुकी है, जिसमें 10 बसों में कमियां पाई गईं, जैसे पुराने टायर, अपर्याप्त सुरक्षा उपकरण और ओवरलोडिंग। इन बसों के मालिकों पर जुर्माना लगाया गया है और सुधार के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने स्कूल प्रबंधनों से अपील की है कि वे बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और प्रशिक्षित ड्राइवरों को सुनिश्चित करें। एक स्कूल बस ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह जांच अच्छी है, क्योंकि इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ती है और बच्चों की सुरक्षा मजबूत होती है।”
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