
पिता की फर्जी मुठभेड़ में मौत का आरोप: High Court ने सरकार से मांगा जवाब, बेटे की याचिका पर Supreme Court ने दिए थे शव सुरक्षित रखने के निर्देश
एक सनसनीखेज मामले में, एक युवक ने अपने पिता की कथित तौर पर फर्जी पुलिस मुठभेड़ में मौत का आरोप लगाया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता के बेटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही शव को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

मामले का विवरण
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसके पिता को पुलिस ने एक सुनियोजित तरीके से फर्जी मुठभेड़ में मार दिया। उसका कहना है कि पुलिस ने इस घटना को अपराधी के साथ मुठभेड़ के रूप में पेश किया, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती और सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था, ताकि पोस्टमॉर्टम और अन्य फोरेंसिक जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया।
परिवार का दर्द
याचिकाकर्ता के परिवार ने इस घटना को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है। परिवार का कहना है कि उनके पिता निर्दोष थे और उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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