
Raipur में 150 करोड़ का जमीन घोटाला उजागर, रेरा ने खरीदी-बिक्री पर लगाई रोक
5 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जिसमें 150 करोड़ रुपये की धांधली का खुलासा हुआ है। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए विवादित जमीन की खरीदी-बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी है। यह घोटाला शहर के बाहरी इलाके में फैले एक बड़े आवासीय प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों निवेशकों का पैसा डूबने का खतरा मंडरा रहा है।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
रेरा की जांच टीम ने गत सप्ताह एक शिकायत के आधार पर छापेमारी की कार्रवाई की, जिसमें कई दस्तावेजों की बरामदगी हुई। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि एक निजी बिल्डर कंपनी ने अवैध तरीके से सरकारी और निजी जमीनों को हड़प लिया था। कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों की रजिस्ट्री कराई और फिर उन्हें सब-प्लॉट्स में बांटकर बेचना शुरू कर दिया। अनुमानित रूप से 150 करोड़ रुपये कीमत की 50 एकड़ से अधिक जमीन इस धांधली का शिकार हुई है।
स्थानीय निवासियों और प्रभावित खरीदारों ने बताया कि उन्हें सस्ते दामों पर प्लॉट बेचे गए, लेकिन अब कंपनी ने प्रोजेक्ट रोक दिया है। एक प्रभावित निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी, लेकिन अब न तो प्लॉट मिल रहा है और न ही रिफंड।”
रेरा की सख्ती: तत्काल रोक का आदेश
रेरा के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. अजय तिवारी ने बताया कि घोटाले की गंभीरता को देखते हुए खरीदी-बिक्री पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है। “हम जांच को गति देंगे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे। सभी प्रभावित पक्षों को नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाएगी,” उन्होंने कहा। रेरा ने बिल्डर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी पुलिस को दिया है।
इसके अलावा, रेरा ने सभी संबंधित जमीनों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं और कोई भी लेन-देन न करने की चेतावनी जारी की है। जांच में पाया गया कि कंपनी ने पर्यावरण मंजूरी और लेआउट प्लान के बिना ही बिक्री शुरू कर दी थी, जो रेरा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रभावितों की संख्या और मांगें
इस घोटाले से करीब 300 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं, जिनमें ज्यादातर मध्यम वर्ग के लोग शामिल हैं। खरीदार संगठन ने रेरा कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया है और मांग की है कि न केवल रिफंड दिया जाए, बल्कि दोषियों को कड़ी सजा हो। संगठन के संयोजक रामेश्वर साहू ने कहा, “सरकार को इस मामले में विशेष जांच समिति गठित करनी चाहिए। हमारी मेहनत की कमाई लूट ली गई है।”
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