
Raipur में बीमार महिला को ठीक करने धर्मांतरण कराने की साजिश
रायपुर में बीमार महिला को ठीक करने के नाम पर किए गए धर्मांतरण की साजिश ने प्रदेश की राजधानी में बड़े स्तर पर सनसनी मचा दी है। छत्तीसगढ़ के दूरदराज इलाकों में प्रचलित धर्मांतरण के मामलों के बाद यह मामला अब राजधानी रायपुर में सामने आया है, जिसने स्थानीय समाज में भारी विवाद को जन्म दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक महिला काफी समय से अस्वस्थ थी और उसके इलाज के बहाने उसके धर्म परिवर्तन की कोशिश की गई। इस कृत्य को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और धर्मांतरण रोकने के लिए मौके पर आकर जोरदार प्रदर्शन किया।

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाया कि इस महिला को सुधारने या ठीक करने के नाम पर कोई चिकित्सा सहायता नहीं दी जा रही थी, बल्कि उसे धर्म बदलने के लिए फंसा लिया गया था। इस प्रकार की धार्मिक चालाकी और धर्म का दुरुपयोग बहुत ही निंदनीय और अस्वीकार्य है, जिसे उन्होंने समाज के लिए खतरा बताया। उन्होंने मौके पर जोर-शोर से जय श्री राम के नारे लगाते हुए धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। स्थानीय जनता भी इस मामले को लेकर गुस्से में दिखी और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करने लगी।
इस पूरे मामले में पुलिस भी सक्रिय हुई और धारा 144 के प्रावधानों के तहत धार्मिक प्रचार करने वाले लोगों को हिरासत में ले लिया गया। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का रोष कम नहीं हुआ, और उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाए कि वह धर्मांतरण कराने वालों को छोड़कर जनता की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। पुलिस के बीच लोगों का पैदल जुलूस निकालने का जोरदार प्रयास हुआ, और पुलिस की गाड़ियों को रोकने जैसे कई विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। इस प्रकार की घटनाओं से समाज में धार्मिक तनाव की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जब इसे बीमार व्यक्तियों की संवेदनशील स्थिति का फायदा उठाकर अंजाम दिया जाता है।

धर्मांतरण के मामले छत्तीसगढ़ में पहले से ही संवेदनशील विषय बने हुए हैं, जहां विभिन्न धार्मिक समूह पर एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा बना रहता है। रायपुर की इस घटना ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे यह मांग उठ रही है कि सतर्कता बरती जाए, और ऐसे मामलों की कड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, यह आवश्यक है कि समाज में सहिष्णुता और एक-दूसरे के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे विवादों को रोका जा सके।
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