
विवादों की भेंट चढ़ा गढ़कलेवा का ठेका, 10 साल से एक ही समूह के पास Tender
रायपुर। राजधानी रायपुर का प्रसिद्ध गढ़कलेवा रेस्टोरेंट एक बार फिर विवादों में है। शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुके इस भोजनालय के ठेके को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार पिछले 10 वर्षों से लगातार एक ही समूह के पास इसका संचालन टेंडर रहता आया है, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
पारंपरिक व्यंजन का प्रतीक
गढ़कलेवा छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने पहुँचते हैं। सरकारी स्तर पर इसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति और खानपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

ठेका प्रक्रिया पर सवाल
स्थानीय संगठनों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि हर साल टेंडर की प्रक्रिया केवल औपचारिकता रह गई है और एक ही कारोबारी समूह लगातार इसका संचालन करता आ रहा है। आरोप है कि इससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो रही है और नए इच्छुक संचालकों को अवसर नहीं मिल रहा।
पारदर्शिता की मांग
कई सामाजिक संगठनों ने नगर निगम और पर्यटन विभाग से मांग की है कि गढ़कलेवा का ठेका पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत किया जाए, ताकि अधिक से अधिक समूहों को हिस्सा लेने का अवसर मिल सके।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले में फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन लगातार उठ रहे सवालों से यह साफ है कि गढ़कलेवा का ठेका आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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