
Chhattisgarh में शिक्षा का नया दौर: 7 नए केंद्रीय विद्यालयों के लिए केंद्र को प्रस्ताव
रायपुर, 3 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने राज्य के सात पिछड़े जिलों में सात नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। यह पहल राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को व्यापक रूप से मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों में उच्च स्तरीय शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रस्ताव को जल्द से जल्द अंतिम रूप देकर भेजा जाए, ताकि इन विद्यालयों का निर्माण शीघ्र शुरू हो सके।

शिक्षा सुधार की आवश्यकता क्यों?
छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारना एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रेट अभी भी 20% से अधिक है, खासकर बालिका छात्राओं के मामले में। केंद्रीय विद्यालयों की कमी के कारण हजारों छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी कोने में रहता हो, उसे CBSE पाठ्यक्रम पर आधारित उत्कृष्ट शिक्षा मिले। ये नए केवी न केवल शैक्षणिक स्तर को ऊंचा करेंगे, बल्कि राज्य की समग्र विकास दर को भी बढ़ावा देंगे।”
प्रस्तावित सात केंद्रीय विद्यालय निम्नलिखित जिलों में खोले जाएंगे:
बलौदाबाजार-भाटापारा: यहां के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा बुनियादी ढांचे की कमी है। नया केवी 500 छात्रों की क्षमता वाला होगा, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा होगी।

बलरामपुर-रामानुजगंज: आदिवासी बहुल इस जिले में लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। विद्यालय में मुफ्त आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
गरियाबंद: हाल ही में यहां बाढ़ और बिजली-पानी की समस्या ने शिक्षा को प्रभावित किया है। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विद्यालय का निर्माण बाढ़ प्रतिरोधी हो और सौर ऊर्जा पर आधारित बिजली व्यवस्था हो।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: वनाच्छादित क्षेत्र होने के कारण यहां पहुंच मुश्किल है। केवी का स्थान चयन स्थानीय समुदाय की सहमति से किया जाएगा।
सारंगढ़-बिलाईगढ़: इस जिले में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है, इसलिए पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को शामिल किया जाएगा।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: दूरस्थ आदिवासी बेल्ट में स्थित यह जिला शिक्षा के मामले में सबसे पिछड़ा है। यहां केवी खुलने से 300 से अधिक बच्चों को लाभ होगा।
बलोद: जिला मुख्यालय के निकट होने से यह केवी अन्य जिलों के छात्रों के लिए भी केंद्र बनेगा।
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