
Korba बाल्को में सुबह-सुबह धमाल: ESP विस्फोट से करोड़ों उड़ गए, मजदूरों की जान पर बनी
3 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित बाल्को (भारत एल्युमिनियम कंपनी) प्लांट में गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें फैक्ट्री की महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) इकाई पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना से कंपनी को करीब 47.90 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह हादसा 20 साल पुराने उपकरण की खराबी और रखरखाव की लापरवाही के कारण हुआ। सरकारी अधिकारियों ने इसे ‘मानव-निर्मित त्रुटि’ करार देते हुए वेदांता ग्रुप (बाल्को की मूल कंपनी) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
घटना का पूरा विवरण: आग और विस्फोट ने मचाई तबाही
हादसा सुबह करीब 8 बजे हुआ, जब प्लांट की स्मेल्टिंग यूनिट में ESP सिस्टम से अचानक धुआं निकलने लगा। धुएं के साथ तेज विस्फोट की आवाज आई और आग की लपटें फैल गईं। ESP, जो एल्युमिनियम उत्पादन के दौरान निकलने वाले धूल और प्रदूषकों को फिल्टर करने का काम करता है, पूरी तरह ध्वस्त हो गया। प्लांट के कर्मचारी और इंजीनियरों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग ने आसपास के पाइपलाइन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को भी अपनी चपेट में ले लिया।

सौभाग्य से, इस हादसे में कोई जानलेवा चोट नहीं लगी, लेकिन दो कर्मचारी झुलस गए, जिन्हें कोरबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। प्लांट को तत्काल बंद करना पड़ा, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। अनुमान है कि मरम्मत और नुकसान की भरपाई में कम से कम 15-20 दिन लगेंगे। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह तकनीकी खराबी थी, लेकिन हम पूरी तरह जांच का सहयोग करेंगे।”
पुरानी लापरवाही का काला इतिहास: 2004-05 से चली आ रही उपेक्षा
यह बाल्को प्लांट का पहला हादसा नहीं है। 20 साल पहले, 2004-05 में वेदांता ग्रुप ने बाल्को के अधिग्रहण के बाद पुराने ESP को बदलने का वादा किया था। तत्कालीन राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इसे अनिवार्य बताया था, क्योंकि पुराना उपकरण पर्यावरण मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। लेकिन कंपनी ने सस्ते में नया इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर लगाने के बजाय पुराने को ही ठीक करने का रास्ता अपनाया।
इसके परिणामस्वरूप, 2009 में एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें ESP में विस्फोट से प्लांट का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। उस समय चार मजदूर घायल हुए थे और कंपनी को 25 करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा। जांच में पाया गया कि रखरखाव की कमी और पुराने पार्ट्स का इस्तेमाल मुख्य कारण थे। उसके बाद भी सबक न लेते हुए, कंपनी ने अपग्रेडेशन में देरी की। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता रमेश साहू ने कहा, “वेदांता ने हमेशा मुनाफे को प्राथमिकता दी। ESP जैसे क्रिटिकल उपकरणों पर खर्च बचाने से न केवल कंपनी को नुकसान होता है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और मजदूरों की जिंदगी खतरे में पड़ती है।”
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



