
Chhattisgarh में धूमधाम से मनेगा RSS का 100वां वर्ष: युवा और ग्रामीण फोकस
रायपुर, 1 अक्टूबर 2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने के उपलक्ष्य में एक वर्षीय शताब्दी समारोह की शुरुआत करने जा रहा है। यह यात्रा इस विजयादशमी (2 अक्टूबर 2025) से प्रारंभ होकर अगली विजयादशमी (20 अक्टूबर 2026) तक चलेगी। छत्तीसगढ़ में संघ की जड़ें 1929 में रायपुर के तिलक नगर में पड़ी थीं, जब पहली शाखा स्थापित की गई। आज प्रदेश में 1855 सक्रिय शाखाएं 1460 स्थानों पर फल-फूल रही हैं। इस शताब्दी वर्ष में संघ न केवल अपने ऐतिहासिक सफर को समर्पित करेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग को एकजुट करने का संकल्प भी लेगा।

छत्तीसगढ़ प्रांत में इस अवसर पर विशेष रूप से 2000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इन सम्मेलनों का उद्देश्य हिंदू समाज को सनातन मूल्यों से जोड़ना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना होगा। इसके अलावा, 50 लाख घरों तक गृह संपर्क अभियान के माध्यम से संघ के कार्यों की जानकारी पहुंचाई जाएगी। युवा पीढ़ी, खासकर जेनरेशन जेड (Gen Z) को आकर्षित करने के लिए युवा सम्मेलनों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मीट का विशेष आयोजन होगा। साथ ही, 3 लाख गणवेशधारी स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन 15 नवंबर तक विभिन्न बस्तियों में निकाला जाएगा। यह संचलन पारंपरिक रूप से महानगर स्तर पर होता रहा है, लेकिन इस बार इसे बस्ती स्तर तक विस्तारित किया गया है, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में संघ की उपस्थिति मजबूत हो।
शताब्दी वर्ष के सात प्रमुख कार्यक्रम: राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रणनीति
आरएसएस के शताब्दी वर्ष में देशभर में सात प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो समाज के विभिन्न वर्गों को छूएंगे। छत्तीसगढ़ में इनका विशेष फोकस स्थानीय आवश्यकताओं पर होगा। यहां इन कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण:
विजयादशमी उत्सव: मंडल और बस्ती स्तर पर गणवेशधारी स्वयंसेवकों एवं उनके परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। देशभर में 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह उत्सव पश्चिम बंगाल में महालय से प्रारंभ हो चुका है। रायपुर में करीब 12,000 स्वयंसेवकों को पथ संचलन में शामिल करने का लक्ष्य है। यह उत्सव संघ की विचारधारा को परिवार स्तर पर मजबूत करेगा।
गृह संपर्क अभियान: नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक तीन सप्ताह चलेगा। थीम रहेगा – “हर गांव, हर बस्ती, घर-घर”। स्वयंसेवक प्रत्येक घर में 15 मिनट रुककर संघ के कार्यों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता पर चर्चा करेंगे। साथ ही, संघ साहित्य वितरण और भारत माता का चित्र भेंट किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में 50 लाख घरों तक पहुंचने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जो प्रदेश की 80% आबादी को कवर करेगा।

हिंदू सम्मेलन: नगर और खंड स्तर पर सामाजिक वर्गों को जोड़ने वाले ये सम्मेलन 1989 और 2006 के बाद फिर से आयोजित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 2000 से अधिक स्थानों पर ये होंगे, जहां सनातन धर्म की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ये सम्मेलन हिंदू समाज में व्याप्त जातिगत विभेद को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे।
युवा सम्मेलन: 15-40 वर्ष के युवाओं के लिए विशेष सम्मेलन, जिसमें खेल-कूद, नेतृत्व विकास और डिजिटल कौशल पर कार्यशालाएं शामिल होंगी। जेन जेड को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया कैंपेन और इन्फ्लुएंसर मीट का आयोजन होगा। प्रांत संघ चालक टोप लाल वर्मा ने कहा, “युवा हमारा भविष्य हैं। हम उन्हें डिजिटल युग में भी सनातन मूल्यों से जोड़ना चाहते हैं।” रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों में ये सम्मेलन भव्य होंगे।
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