
बलरामपुर में गंभीर घटना: 21 वर्षीय छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक 21 वर्षीय छात्रा के साथ कथित रूप से दुष्कर्म की घटना ने सनसनी फैला दी है। घटना के बाद पुलिस की कथित लापरवाही और FIR दर्ज करने में देरी से स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरगुजा रेंज के IG ने संज्ञान लिया है और पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
घटना का पूरा घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना जशपुर जिले के सीमा क्षेत्र में बलरामपुर के एक कॉलेज परिसर में हुई। 21 वर्षीय छात्रा ने पुलिस को बताया कि 28 सितंबर 2025 को दोपहर के समय एक आरोपी छात्र ने उसे अकेले में फंसाकर गलत नियत से छेड़छाड़ की, जो बाद में दुष्कर्म का रूप ले लिया। पीड़िता ने तुरंत अपने अभिभावकों को सूचित किया, लेकिन परिवार ने सामाजिक कलंक के डर से initially मामले को दबाने की कोशिश की। हालांकि, पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शुरू में FIR दर्ज करने में आनाकानी की और पीड़िता को सही जवाब देने से मना कर दिया। इस बीच, आरोपी छात्र फरार हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बलरामपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जांच में देरी की। पीड़िता के परिजनों ने बताया कि पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय उन्हें समझौते के लिए दबाव डाला।

IG का हस्तक्षेप और कार्रवाई
सुरगुजा रेंज के IG ने मामले की शिकायत मिलने के बाद तत्काल संज्ञान लिया। 29 सितंबर 2025 को IG ने बलरामपुर पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि वे तुरंत FIR दर्ज करें और जांच शुरू करें। इसके तहत धारा 332 (बलवा), धारा 64 (2) (दुष्कर्म का दंड), और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। IG के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने 22 सितंबर को हुई घटना (संशोधित तारीख के अनुसार) की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश तेज कर दी।
बलरामपुर पुलिस ने बताया कि SDOP के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जो मामले की जांच कर रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही, SDOP ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि किसी भी महिला के साथ इस तरह की घटना असहनीय है, और दोषी को सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
पीड़िता और परिजनों का दर्द
पीड़िता ने कहा, “मैंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर दिया। मेरे परिजनों ने भी शुरू में शिकायत करने से मना किया, लेकिन अब मैं न्याय चाहती हूं।” पीड़िता के पिता ने बताया कि पुलिस ने उन्हें समझौता करने के लिए दबाव डाला, जिससे परिवार में तनाव बढ़ गया। उन्होंने IG से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और बेटी को इंसाफ मिले।
स्थानीय प्रतिक्रिया और सवाल
स्थानीय लोगों ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब बलरामपुर पुलिस ने ऐसी घटना में देरी की हो। नाबालिगों और युवतियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।” दूसरी ओर, कुछ लोगों ने परिजनों पर भी सवाल उठाए कि उन्होंने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

इस घटना ने कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और दोषी छात्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 64 (2) और संभवतः POCSO एक्ट (अगर पीड़िता नाबालिग साबित होती है) के तहत दर्ज हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की शुरुआती लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, पीड़िता को काउंसलिंग और कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
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