
कबीरधाम: कवर्धा में आदिवासी युवती से सामूहिक दुष्कर्म, आरोपियों का जुलूस निकालकर पुलिस ने बढ़ाया जनाक्रोश
कवर्धा, 28 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के कवर्धा में एक आदिवासी युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस जघन्य अपराध ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया, बल्कि पुलिस की एक विवादास्पद कार्रवाई ने भी जनाक्रोश को हवा दी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की, लेकिन आरोपियों का जुलूस निकालने का फैसला विवादों में घिर गया है। पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवाई के नेतृत्व में इस मामले की गहन जांच जारी है।
रात के अंधेरे में जघन्य अपराध
पुलिस के अनुसार, यह घटना 23-24 सितंबर की रात को हुई, जब पीड़िता अपने साथी के साथ विवाद के बाद अकेले बस स्टैंड की ओर जा रही थी। तीन युवकों, मोहम्मद सरफराज, नसीम अहमद उर्फ छोटू और जितेंद्र खरे उर्फ जित्तू, ने पीड़िता का अपहरण कर लिया और उसे सुनसान अटल आवास के पीछे ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। नशे में धुत आरोपियों ने पीड़िता को धमकियां दीं और उसे बस स्टैंड के पास छोड़कर फरार हो गए। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोतवाली थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

36 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवाई ने तत्काल कई टीमें गठित कीं और 36 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को कवर्धा के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से सिलेशन ट्यूब और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, और घटनास्थल का रीक्रिएशन कर सबूत एकत्र किए गए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(डी) (सामूहिक दुष्कर्म) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरोपियों का जुलूस: विवाद का कारण
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों का शहर में जुलूस निकाला, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। पुलिस का दावा है कि यह कदम अपराधियों में डर पैदा करने और जनता को यह दिखाने के लिए उठाया गया कि अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और अनावश्यक तमाशा करार दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह कदम न केवल पीड़िता की गोपनीयता को खतरे में डालता है, बल्कि सामुदायिक तनाव को भी बढ़ा सकता है।”
आदिवासी और मुस्लिम समाज का गुस्सा
घटना के बाद आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आया और कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने आरोपियों को कड़ी सजा और पीड़िता को त्वरित न्याय की मांग की। मुस्लिम समाज ने भी इस अपराध की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया के नेतृत्व में एक सात सदस्यीय जांच समिति बनाई है, जो पीड़िता से मुलाकात कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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