
Chhattisgarh High Court का SC-ST एक्ट पर बड़ा फैसला: अपमान की नीयत न हो तो जातिसूचक शब्द बोलना अपराध नहीं
रायपुर, 27 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई जातिसूचक शब्द या अपमानजनक भाषा का प्रयोग अपमान करने की स्पष्ट नीयत के बिना किया जाता है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा। यह फैसला एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए आया है, जहां विवाद के दौरान जातिगत टिप्पणी का आरोप था। कोर्ट का यह निर्णय एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।

फैसले का आधार और कानूनी तर्क
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(र) के तहत अपराध तभी स्थापित होता है, जब अपमान या धमकी का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पीड़ित की जाति के कारण अपमानित करना हो। यदि शब्दों का प्रयोग सामान्य विवाद या आवेश में हो और अपमान की नीयत सिद्ध न हो, तो एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे। जस्टिस ने कहा, “कानून का उद्देश्य जातिगत भेदभाव को रोकना है, न कि हर विवाद को जातिगत रंग देना।” यह फैसला उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों पर आधारित है, जहां भी नीयत को अपराध का मूल तत्व माना गया है।
मामले का विवरण
यह फैसला जावेद खान बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में आया है। आरोपी पर आरोप था कि उन्होंने एक एससी समुदाय के व्यक्ति के साथ विवाद के दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। हालांकि, जांच में पाया गया कि विवाद व्यक्तिगत था और अपमान की नीयत सिद्ध नहीं हुई। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की और कहा कि एक्ट का दुरुपयोग रोकना आवश्यक है। कोर्ट ने जोर दिया कि यदि अपराध एक्ट के तहत दुरुपयोग लगे, तो अदालतें जमानत देने का अधिकार रखती हैं।
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