
Chhattisgarh में CGPSC भर्ती परीक्षा में अनियमितता का मामला उजागर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षा में एक बार फिर “फर्जीवाड़ा” का मामला सामने आया है। इस बार मामला एक अभ्यर्थी के चयन से जुड़ा है, जिसने साक्षात्कार के दौरान मूल स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया, फिर भी उसे मेरिट के आधार पर चयनित कर लिया गया। इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।

मूल प्रमाण पत्र के बिना चयन पर सवाल
जानकारी के अनुसार, CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी द्वारा साक्षात्कार के समय मूल स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बावजूद, अभ्यर्थी को मेरिट लिस्ट में शामिल कर चयनित कर लिया गया। इस अनियमितता को लेकर बिलासपुर के दिग्विजय दास सिरमौर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें इस चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान
दिग्विजय दास सिरमौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने CGPSC को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आयोग को इस मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में CGPSC को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी और चयन प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितता पर जवाब देना होगा।
पहले भी विवादों में रहा है CGPSC
यह पहली बार नहीं है जब CGPSC की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी आयोग की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं। इस नए मामले ने एक बार फिर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों और आम जनता में इस बात को लेकर आक्रोश है कि ऐसी अनियमितताएं भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।
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