
Kanker: पखांजूर में अवैध बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी, आदिवासी समाज फिर करेगा मोर्चा खोलने की तैयारी
कांकेर, 27 सितंबर 2025 – छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने स्थानीय आदिवासी समुदाय में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। पुलिस की विशेष छापेमारी में छह संदिग्ध बांग्लादेशियों को पकड़ा गया, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे यहां मजदूरी और छोटे कारोबार में लगे हुए थे। इस घटना ने पुरानी रंजिश को फिर से हवा दे दी है, जहां आदिवासी संगठन अब बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में जुट गए हैं। राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है।

छापेमारी का विवरण: छह बांग्लादेशी पकड़े गए, फर्जी दस्तावेज बरामद
पखांजूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुरुवार सुबह पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये छह व्यक्ति बांग्लादेश के विभिन्न जिलों से 5-7 वर्ष पूर्व अवैध रूप से भारत में घुसे थे और पखांजूर के निर्माण स्थलों पर मजदूरी कर रहे थे। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य
दस्तावेज बरामद हुए, जो स्थानीय स्तर पर ही बनवाए गए थे।
पुलिस अधीक्षक कांकेर ने बताया, “ये व्यक्ति स्थानीय संसाधनों का अतिक्रमण कर रहे थे और आदिवासी समुदाय के रोजगार के अवसर छीन रहे थे। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि वे सीमा पार कर कोलकाता होते हुए छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। सभी को विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।” घटना के बाद इलाके में पुलिस तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
पुरानी रंजिश: बांग्लादेशी घुसपैठ और आदिवासी आरक्षण का विवाद
यह पहली बार नहीं है जब कांकेर और पखांजूर में अवैध बांग्लादेशियों को लेकर विवाद उभरा है। 1970 के दशक से बांग्लादेशी मूल के लोग बस्तर क्षेत्र में बसते आए हैं, जिन्हें कुछ आदिवासी संगठन शरणार्थी के नाम पर आरक्षण का लाभ लेने वाला मानते हैं। सर्व आदिवासी समाज के नेता चंद्रकांत धुर्वा ने कहा, “ये घुसपैठिए हमारे जंगलों, जमीनों और नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं। आरक्षण हमारा हक है, इसे कोई छीन नहीं सकता।”
पिछले वर्षों में इसी मुद्दे पर बंद, चक्काजाम और मोर्चे निकाले जा चुके हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने 30 से अधिक बांग्लादेशियों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई की थी, जो इस अभियान का हिस्सा है। आदिवासी समुदाय का आरोप है कि प्रशासन की नरमी से ये लोग बढ़ते जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए अवसर कम हो रहे हैं।
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