
लेह में हिंसक झड़पों का दौर: सोनम वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार, इंटरनेट सेवाएं ठप
लद्दाख, 26 सितंबर 2025: लद्दाख के लेह क्षेत्र में जल संसाधनों और स्थानीय अधिकारों को लेकर भड़की हिंसा ने एक नया मोड़ ले लिया है। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही, क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पिछली रात हुई झड़पों में चार लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हो चुके हैं। प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी: NSA का इस्तेमाल क्यों?
सोनम वांगचुक, जो लद्दाख के जल संरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में जाने जाते हैं, को गुरुवार रात लेह के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उन्हें NSA की धारा 3 के तहत हिरासत में लिया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की अनुमति देता है। वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने हाल के प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को उकसाया, जिससे हिंसा भड़क उठी।

वांगचुक के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, “सोनम जी ने सिर्फ पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की बात की थी। NSA का इस्तेमाल लोकतंत्र की हत्या है।” वांगचुक को लेह की केंद्रीय जेल में रखा गया है, और उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है।
लेह में इंटरनेट ब्लैकआउट: संचार पर पाबंदी का असर
हिंसा को नियंत्रित करने के लिए लेह जिले में इंटरनेट सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है। मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सभी प्रभावित हैं। यह कदम प्रदर्शनकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो और अपीलों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्थानीय व्यापारियों और छात्रों को इससे भारी परेशानी हो रही है। एक दुकानदार ने बताया, “बैंकिंग से लेकर ऑनलाइन ऑर्डर तक सब ठप हो गया। लोग परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे।” प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी है, लेकिन बहाली की कोई समयसीमा नहीं बताई गई।
हिंसक झड़पों में चार की मौत: क्या है पूरा घटनाक्रम?
पिछले 48 घंटों में लेह के बाजार क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। जल संसाधनों के कुप्रबंधन और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ शांतिपूर्ण मार्च सोमवार को हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया।
मंगलवार रात की सबसे खतरनाक झड़प में चार लोग मारे गए—तीन प्रदर्शनकारी और एक सुरक्षाकर्मी। घायलों की संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है। अस्पताल स्रोतों के मुताबिक, ज्यादातर चोटें गोलीबारी और पथराव से लगी हैं। केंद्र सरकार ने लद्दाख के उपराज्यपाल को स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं।
लद्दाख आंदोलन की पृष्ठभूमि: जल विवाद से उपजा संकट
यह हिंसा लद्दाख में जल संरक्षण और स्थानीय स्वायत्तता की लंबे समय से चली आ रही मांगों का परिणाम है। सोनम वांगचुक ने ‘सीच लेह’ अभियान के तहत ग्लेशियरों के पिघलने और जल संकट पर ध्यान केंद्रित किया था। हाल ही में केंद्र की एक नीति ने स्थानीय समुदायों को नजरअंदाज करते हुए बड़े बांधों की योजना बनाई, जिससे आक्रोश भड़का।
विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस नेता ने कहा, “लद्दाख के लोगों की आवाज दबाना गलत है। तत्काल बातचीत होनी चाहिए।” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान न निकला, तो यह आंदोलन पूरे क्षेत्र में फैल सकता है।
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