
Fake अकाउंट Holder-APK: Cyber ठगों का नया टारगेट
बैंक अफसर भी फंसे, 6 पैटर्न से समझें ठगी के तरीके, 3 साल में छत्तीसगढ़ से 791 करोड़ ठगे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों ने ठगी का नया तरीका खोज निकाला है। “फेक अकाउंट होल्डर-APK” के जरिये ठग बड़े-बड़े अफसरों और आम लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। पिछले 3 सालों में ही राज्य से लगभग 791 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में रायपुर के नामी बिल्डर सुबहोध सिंघानिया के नाम पर हुई ठगी ने इस नए ट्रेंड को उजागर किया है।

कैसे हुआ ठगी का मामला?
ठगों ने 8 लाख 70 हजार रुपये की ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों ने खुद को सिंघानिया बताकर पहले बैंक मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर से फोन पर संपर्क किया। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां से सिंघानिया के नाम से लेटरहेड और रकम ट्रांसफर करने का आदेश भेजा गया। ठगों के झांसे में आकर रकम को कोलकाता स्थित एक निजी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
ठगों का नया तरीका: “फेक अकाउंट होल्डर-APK”
इस मामले में सामने आया कि ठगों ने बैंक अधिकारियों से राशि मंगवाने के लिए एक फर्जी APK (Android Package Kit) का सहारा लिया। इस तकनीक के जरिए फर्जी अकाउंट और डॉक्यूमेंट बनाकर असली जैसा माहौल तैयार कर दिया जाता है।
जैसे ही ठगी का पता चला, बैंक की असिस्टेंट मैनेजर ने इस पूरे मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने अब जांच शुरू कर दी है।

6 पैटर्न में कैसे फंसाते हैं ठग?
साइबर ठग अब कई तरह के पैटर्न पर काम कर रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- फेक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना – बड़े अफसर या कारोबारी के नाम से ग्रुप बनाकर आदेश जारी करना।
- फर्जी APK लिंक भेजना – पीड़ित को ऐसा लिंक भेजना, जिसे क्लिक करते ही मोबाइल डेटा हैक हो जाता है।
- फेक कॉल्स और ईमेल्स – बैंक अधिकारी या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर संपर्क करना।
- फर्जी डॉक्यूमेंट्स और लेटरहेड – असली कंपनी या व्यक्ति के नाम से नकली कागजात तैयार करना।
- फर्जी अकाउंट होल्डर – असली नाम से मिलते-जुलते फर्जी बैंक खाते खुलवाना।
- सोशल इंजीनियरिंग – भरोसा जीतकर धीरे-धीरे पैसे ट्रांसफर करवाना।
बैंक अफसर भी आ रहे निशाने पर
अब तक के मामलों से साफ है कि साइबर ठग केवल आम लोगों को ही नहीं बल्कि बैंक मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर जैसे अधिकारियों को भी अपने जाल में फंसा रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ठग अब पहले से ज्यादा तकनीकी और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं।
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