
Raipur हत्याकांड: फारूक खान की बेरहमी से हत्या ने शहर को हिलाया,उम्रकैद की सजा को घटाकर 10-10 साल की सश्रम कारावास में बदल
25 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो साल पहले हुई बहुचर्चित फारूक खान हत्याकांड ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बुधवार को इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों की उम्रकैद की सजा को घटाकर 10-10 साल की सश्रम कारावास में बदल दिया। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए झटका है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी को समझते हैं।

घटना का काला अध्याय: पारिवारिक विवाद ने लिया खौफनाक रूप
फरवरी 2023 में रायपुर के एक व्यस्त इलाके में फारूक खान (42) की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। फारूक एक स्थानीय व्यवसायी थे, जो अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक सक्रियता के लिए जाने जाते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या का मुख्य कारण पारिवारिक विवाद था। फारूक के सौतेले भाई और उनके दो सहयोगियों ने साजिश रचकर यह वारदात को अंजाम दिया। घटनास्थल पर मिले सबूतों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ हो गया कि यह सुनियोजित हत्या थी।
पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज की और तीनों आरोपियों—अब्दुल्ला खान, राशिद अली और मोहम्मद सलीम—को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में पता चला कि विवाद संपत्ति बंटवारे को लेकर था, जो वर्षों से सुलझा नहीं था। फारूक की पत्नी ने बताया कि हफ्तों पहले से ही उन्हें धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यह घटना रायपुर में सनसनी फैला गई थी, क्योंकि शहर में पारिवारिक विवादों से जुड़ी ऐसी क्रूर हत्याएं दुर्लभ होती हैं।
निचली अदालत का सख्त फैसला: उम्रकैद ने दी थी न्याय की उम्मीद
जून 2024 में रायपुर की सेशन कोर्ट ने तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने हत्या की क्रूरता को देखते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध समाज के लिए खतरा है और सजा से सबक मिलना चाहिए।
पीड़ित परिवार ने इस फैसले का स्वागत किया था। फारूक के भाई ने कहा, “यह न्याय की पहली जीत है। हमारी फैमिली को जो दर्द हुआ, वह कभी न भर सकेगा, लेकिन कम से कम अपराधियों को सजा मिली।” इस फैसले के बाद मामला हाईकोर्ट में अपील के लिए चला गया, जहां आरोपियों ने सबूतों की कमी और प्रक्रियागत त्रुटियों का हवाला दिया।
हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला: 10 साल की सजा पर सवालों का सैलाब
बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 24 सितंबर को सुनवाई पूरी करते हुए उम्रकैद को घटाकर 10 साल की सजा कर दी। जस्टिस की बेंच ने तर्क दिया कि अपराध में इस्तेमाल हथियार सामान्य था और कोई पूर्व नियोजित साजिश का पुख्ता सबूत नहीं मिला। साथ ही, आरोपियों के अच्छे चरित्र प्रमाण-पत्रों को भी ध्यान में रखा गया। कोर्ट ने कहा, “सजा सुधारात्मक होनी चाहिए, न कि केवल दंडात्मक।”
यह फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में हंगामा मच गया। पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा, “यह फैसला न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। 10 साल में अपराधी बाहर आ जाएंगे, जबकि फारूक कभी वापस नहीं लौटेंगे।” परिवार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया है।
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