
Raipur: बघेल सरकार में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया की 8 करोड़ की संपत्तियां जब्त, आर्थिक अपराध शाखा की सख्त कार्रवाई
रायपुर, 24 सितंबर 2025 (विशेष संवाददाता): छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को नई गति मिली है। पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव के पद पर तैनात राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) अधिकारी सौम्या चौरसिया की लगभग 8 करोड़ रुपये कीमत की 16 संपत्तियों को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई अवैध स्रोतों से अर्जित संपत्ति (डीए) के मामले में की गई है। सौम्या चौरसिया कोल घोटाले में पहले ही जेल में बंद हैं, और यह पहली बार है जब राज्य में किसी सिविल सेवक की अवैध संपत्ति पर ईओडब्ल्यू ने अंतरिम कुर्की की है। जांच में सामने आया है कि उन्होंने परिवार और परिचितों के नाम पर करीब 47 करोड़ की 45 संपत्तियां खरीदीं, जिनमें से 39 करोड़ की 29 संपत्तियां पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त हो चुकी हैं।

मामले की पृष्ठभूमि: कोल लेवी घोटाले से जुड़ी अवैध कमाई का खुलासा
सौम्या चौरसिया 2018 से 2023 तक भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार में सीएमओ में उप सचिव रहीं। दिसंबर 2022 में उन्हें कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें आरोप था कि कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये का अवैध लेवी वसूला जाता था। ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान पता चला कि सौम्या ने अपनी ज्ञात आय के सापेक्ष कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है।
इनमें कोल लेवी के फंड और अन्य भ्रष्ट स्रोतों से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया गया।
ईओडब्ल्यू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “सौम्या ने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं। मंगलवार को हमने 16 प्रॉपर्टी जब्त कीं, जिनकी कुल कीमत 8 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई कोल घोटाले की गहन जांच का हिस्सा है।” ईडी ने पहले ही 29 संपत्तियों को सील कर दिया था, जिससे कुल जब्ती 47 करोड़ के करीब पहुंच गई है। सौम्या पर 540 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में कार्टेल के साथ सांठगांठ का आरोप है।

जब्त संपत्तियों का विवरण: रायपुर और आसपास के इलाकों में फैली प्रॉपर्टी
जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में रायपुर के विभिन्न इलाकों में स्थित फ्लैट, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। इनमें सौम्या के पति, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदारों के नाम दर्ज हैं। कुल 45 संपत्तियों में से ये 16 नवीनतम खोज हैं, जो कोल घोटाले से जुड़े फंड से खरीदी गईं। अधिकारी ने कहा, “ये संपत्तियां अवैध कमाई का स्पष्ट प्रमाण हैं। आगे की जांच में और खुलासे हो सकते हैं।”
इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई सरकार की सख्ती का संदेश गया है। सौम्या की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जो पूर्व कांग्रेस शासनकाल के अधिकारियों पर केंद्रित है।

ईओडब्ल्यू की कार्रवाई: राज्य में पहली बार सिविल सेवक की डीए जब्ती
यह छत्तीसगढ़ में पहली घटना है जब ईओडब्ल्यू ने किसी सिविल सेवक की अवैध संपत्ति पर अंतरिम कुर्की की है। एसीबी-ईओडब्ल्यू के महानिदेशक ने कहा, “हम भ्रष्टाचार के हर पहलू की जांच कर रहे हैं। सौम्या मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, और संपत्ति जब्ती से सरकारी खजाने को लाभ होगा।” वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार ने भूपेश बघेल काल के घोटालों की जांच को प्राथमिकता दी है।
सौम्या को 2022 में गिरफ्तार किए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था। कोर्ट ने उन्हें रिमांड पर लिया था, और अब ईओडब्ल्यू की हिरासत में वे पूछताछ का सामना कर रही हैं। एजेंसी ने अन्य अधिकारियों पर भी नजर रखी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस पर हमला, भाजपा का स्वागत योग्य कदम
इस कार्रवाई पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेता ने कहा, “यह बघेल सरकार के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश है। कोल घोटाले में करोड़ों की लूट हुई, अब संपत्तियां जब्त हो रही हैं।” वहीं, कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “ईओडब्ल्यू का दुरुपयोग हो रहा है। सौम्या निर्दोष हैं, और यह जांच निष्पक्ष नहीं है।”
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। पूर्व मुख्य सचिव आर.पी. शर्मा ने कहा, “सिविल सेवकों के लिए यह चेतावनी है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है।” विपक्ष ने विधानसभा में चर्चा की मांग की है।
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