
कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर बगावत: 7 में से 5 पार्षदों ने PCC के फैसले का विरोध किया
रायपुर नगर निगम में विपक्ष के नेता (नेता प्रतिपक्ष) के पद को लेकर कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने आकाश तिवारी को यह जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन 7 कांग्रेस पार्षदों में से 5 ने फैसले का खुलकर विरोध कर दिया। इन पार्षदों ने पार्टी फोरम पर इस्तीफा देने की धमकी दी थी, लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है। निगम सभापति सूर्यकांत राठौर ने मंगलवार को इन पार्षदों की राय जानने के लिए बैठक बुलाई, जहां सभी ने आकाश तिवारी को समर्थन देने से इनकार कर दिया।

अब पार्टी स्तर पर विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला होगा। यह विवाद अप्रैल से चला आ रहा है और निगम के बजट व अन्य महत्वपूर्ण सभाओं को प्रभावित कर रहा है।
विवाद की शुरुआत: आकाश तिवारी का बगावती रुख और PCC का फैसला
रायपुर नगर निगम चुनाव 11 फरवरी 2025 को हुए थे, जिसमें 70 वार्डों में बीजेपी ने 60, कांग्रेस ने केवल 7 और 3 निर्दलीय पार्षद जीते। कांग्रेस के एमआईसी सदस्य रहे आकाश तिवारी को पार्टी टिकट न मिलने पर उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ला वार्ड-34 से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 1200 से अधिक वोटों से जीत हासिल की।इसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था, लेकिन अप्रैल में वापस शामिल कर लिया।
18 मार्च 2025 को शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गिरीश दुबे ने पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर पार्षद संदीप साहू को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया और निगम को पत्र भेज दिया। सभापति सूर्यकांत राठौर ने इसे मान्यता भी दे दी। लेकिन 16 अप्रैल 2025 को PCC ने प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के अनुमोदन पर सभी 10 नगर निगमों के लिए नेता प्रतिपक्ष की सूची जारी की, जिसमें रायपुर के लिए आकाश तिवारी का नाम था। जयश्री नायक को उपनेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
इस फैसले से नाराज संदीप साहू समर्थक पार्षदों ने बगावत कर दी। अप्रैल के अंत में 5 पार्षदों—संदीप साहू, जयश्री नायक, रोनिता जगत, दीपमणि साहू और रेणु साहू—ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लेकिन मई 2025 में इन इस्तीफों को वापस ले लिया गया, जिससे आंतरिक खींचतान कम हुई मानी गई। फिर भी विवाद थमा नहीं, और आठ महीनों से नेता प्रतिपक्ष का पद अधर में लटका है।
मंगलवार की बैठक: 5 पार्षदों ने PCC फैसले को ठुकराया
मंगलवार (23 सितंबर 2025) को सभापति सूर्यकांत राठौर ने इन 5 पार्षदों को शाम 4 बजे अपने कक्ष में बुलाया। बैठक में सभी ने आकाश तिवारी को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया। सभापति ने कहा, “निगम में पार्टी द्वारा अधिकृत पार्षद को ही नेता प्रतिपक्ष माना जाता है। चूंकि 5 पार्षदों ने विरोध दर्ज किया है, इसलिए जानकारों से राय लेने के बाद फैसला लेंगे।” पिछली बैठक (17 सितंबर) जयश्री नायक, रोनिता जगत और दीपमणि साहू के अनुपस्थित होने से स्थगित हो गई थी।
मौदहापारा से पार्षद मुंसीर राम और पूर्व महापौर एजाज ढेबर की पत्नी (पार्षद) ही PCC के फैसले के साथ हैं। सभापति ने स्पष्ट किया कि यह पहली बार है जब पार्षदों ने पार्टी हाईकमान के फैसले के खिलाफ खुला विरोध किया है।

पार्षदों और पार्टी नेताओं के बयान: सहमति की कमी पर जोर
संदीप साहू (कांग्रेस पार्षद): “मैं कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। मुझे पार्षदों की सहमति से नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। आकाश तिवारी के नाम पर कोई सहमति नहीं ली गई। यह फैसला पार्टी के लिए गलत उदाहरण है।”
मलकीत सिंह गैदू (प्रदेश संगठन महामंत्री, कांग्रेस): “पार्षदों की राय पर पार्टी स्तर पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद प्रक्रिया तय करेंगे। अनुशासनहीनता पर सख्ती जरूरी है, लेकिन एकजुटता बनाए रखेंगे।” कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने अप्रैल में कहा था कि PCC का फैसला अंतिम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर टकराव जारी रहा।
विवाद का असर: निगम कार्य ठप, BJP का तंज
यह विवाद निगम के बजट सत्र (मार्च-अप्रैल 2025) से लेकर विशेष सभाओं तक प्रभावित कर रहा है। अप्रैल में विशेष सभा में आकाश तिवारी अनुपस्थित रहे, जबकि संदीप साहू ने भूमिका निभाई। BJP ने इसे कांग्रेस की आंतरिक कलह बताते हुए तंज कसा: “संदीप OBC से हैं, उन्हें हटाकर बागी को इनाम देना गलत है।”
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