
27% OBC आरक्षण पर Supreme Court में आज से रोजाना सुनवाई
मध्य प्रदेश में लंबे समय से चला आ रहा 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दहलीज पर है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को ‘टॉप ऑफ द बोर्ड’ में लिस्टेड रखा है, यानी अन्य मामलों से ऊपर प्राथमिकता दी गई है। आज (24 सितंबर 2025) से कोर्ट नंबर-2 में दो जजों की बेंच इस पर रोजाना सुनवाई करेगी। राज्य सरकार ने तमिलनाडु के वरिष्ठ वकील पी. विल्सन के साथ-साथ दो अतिरिक्त अधिवक्ताओं को नियुक्त कर प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी की है। यह सुनवाई OBC वर्ग के उम्मीदवारों की याचिका पर होगी, जिसमें 13 प्रतिशत पदों को होल्ड करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।

मामले की पृष्ठभूमि: 2019 का कानून और हाईकोर्ट के आदेश
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का विवाद 2019 से चला आ रहा है। उसी वर्ष विधानसभा ने ‘मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस (SC, ST, OBC के लिए आरक्षण) संशोधन अधिनियम’ पारित किया, जिसमें OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। इसका उद्देश्य OBC आबादी (लगभग 51 प्रतिशत) के अनुपात में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना था। हालांकि, हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर इसकी पूर्ण लागू करने पर रोक लगा दी, क्योंकि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो जाता (SC/ST के 36 प्रतिशत के साथ कुल 63 प्रतिशत)।
हाईकोर्ट ने 87:13 फॉर्मूला लागू किया, जिसमें 13 प्रतिशत OBC पदों को होल्ड कर दिया गया। इससे MPPSC, PEB, TET जैसी भर्तियों पर असर पड़ा। जनवरी 2025 में हाईकोर्ट ने 87:13 फॉर्मूला को बरकरार रखा, लेकिन अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण पर कोई स्थायी रोक नहीं है।df7c5e इसके बावजूद, भर्तियां रुकी हुई हैं, जिससे OBC उम्मीदवार प्रभावित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: रोजाना प्रक्रिया और बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में दैनिक सुनवाई का फैसला किया था, जो आज से शुरू हो रही है दो जजों की बेंच (जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल) कोर्ट नंबर-2 में याचिकाओं पर विचार करेगी। OBC महासभा ने भी हलफनामा दायर कर 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को मजबूत किया है। सुनवाई का फैसला न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा, जहां 50 प्रतिशत सीमा पर बहस जारी है।
राज्य सरकार की रणनीति: दिल्ली में बैठक और वकीलों की टीम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज और एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह के साथ बैठक कर कानूनी रणनीति तैयार की। राज्य ने तमिलनाडु के वरिष्ठ वकील पी. विल्सन को मुख्य वकील नियुक्त किया है, जो OBC आरक्षण मामलों में विशेषज्ञ हैं। उनके अलावा दो अतिरिक्त अधिवक्ता भी प्रदेश का पक्ष रखेंगे OBC महासभा ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर समर्थन दिया।

OBC उम्मीदवारों की गुहार: भर्तियां रुकीं, भविष्य अधर में
OBC वर्ग के उम्मीदवारों का कहना है कि 13 प्रतिशत पदों को होल्ड करने से उनकी भर्ती प्रक्रियाएं ठप हैं। MPPSC, PEB और TET जैसी परीक्षाओं में हजारों सीटें प्रभावित हुई हैं। एक उम्मीदवार ने बताया, “हमारा भविष्य दांव पर है। 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से हमें न्याय मिलेगा।” राज्य सरकार का दावा है कि OBC आबादी 51 प्रतिशत होने से यह आरक्षण उचित है।
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