
छत्तीसगढ़ का पहला Floating Solar Plant तैयार, मंगलवार को होगा लोकार्पण
भिलाई, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ ने ऊर्जा उत्पादन और हरित तकनीक में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के मरोदा जलाशय में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट तैयार हो चुका है। इस परियोजना का लोकार्पण मंगलवार को किया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश के लिए न सिर्फ हरित ऊर्जा का नया आधार तैयार करेगी, बल्कि जल और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

परियोजना का विवरण और तकनीकी जानकारी
- स्थान: भिलाई स्टील प्लांट का मरोदा जलाशय, जो लगभग 2.1 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
- कुल क्षमता: 15 मेगावाट, जिसमें से पहले चरण में 5 मेगावाट का प्लांट बनकर तैयार है।
- पहला चरण क्षेत्रफल: 80 एकड़ पर फैला 5 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट।
- पूर्ण परियोजना क्षेत्रफल: 400 एकड़।
- उर्जा उत्पादन: बीएसपी प्रबंधन ने 2023-24 के दौरान इस सोलर एनर्जी से कुल 1,57,610 यूनिट बिजली का उत्पादन किया।
- आर्थिक लाभ: इस उत्पादन से सेल-बीएसपी को प्रतिमाह लगभग ₹10,71,751 का राजस्व प्राप्त होता है।
- प्रक्रिया और क्रियान्वयन: परियोजना का क्रियान्वयन एनटीपीसी-सेल पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड (NSPCL) द्वारा किया जा रहा है।
फ्लोटिंग सोलर प्लांट का महत्व
1. जल संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन:
यह परियोजना जलाशय की सतह पर स्थापित पैनलों के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करती है। यह तकनीक पारंपरिक भूमि आधारित सोलर प्लांट की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है और जलाशय में पानी के वाष्पीकरण को भी कम करती है।
2. हरित ऊर्जा का स्रोत:
इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली सीधे ग्रिड में भेजी जाएगी, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान होगा।
3. प्रदेश का पहला अनुभव:
छत्तीसगढ़ में यह पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट है, जो भविष्य में राज्य में बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शन करेगा।
4. आगे की योजनाएं:
पहले चरण के 5 मेगावाट के सफल निर्माण के बाद अब परियोजना के अगले चरण में अतिरिक्त 10 मेगावाट की क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट तेजी से तैयार किया जा रहा है।

राज्य और पर्यावरणीय दृष्टि
भिलाई में यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन का भी मॉडल पेश करती है। जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने से जलाशय में वाष्पीकरण कम होता है और पानी की मात्रा बनी रहती है, जिससे कृषि और अन्य जल संबंधी गतिविधियों को फायदा मिलता है।
मुख्य उद्देश्य है:
- राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना।
- पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना।
- जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



