
Jagdalpur नक्सलवाद के खात्मे की ओर बड़ा कदम: बस्तर में गुडसा और कोसा ढेर
छत्तीसगढ़। बस्तर को दशकों से दहशत में रखने वाले दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के दो शीर्ष नक्सली नेता—गुडसा उसेंडी और कोसा दादा—सोमवार को अबूझमाड़ में हुई भीषण मुठभेड़ में मारे गए। सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में तीन घंटे चली गोलीबारी के बाद जवानों ने दोनों को ढेर कर दिया।

हिड़मा के सीनियर, आतंक का दूसरा नाम
गुडसा और कोसा नक्सली संगठन में उतने ही खतरनाक माने जाते थे जितना कुख्यात हिड़मा। दोनों पर छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था। स्थानीय लोग इनके नाम से भी कांप उठते थे। इनकी मौत को नक्सल संगठन की “बैकबोन टूटना” माना जा रहा है।
सेंट्रल कमेटी से जुड़े बड़े चेहरे
दोनों नक्सली तेलुगु कैडर से थे और सेंट्रल कमेटी के अहम सदस्य थे। खुफिया इनपुट के बाद अबूझमाड़–महाराष्ट्र सीमा के कोहकामेटा ग्राम के पास निलांगूर जंगल में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन लांच किया। सुबह 11 बजे शुरू हुई मुठभेड़ दोपहर तक चली। सर्चिंग के दौरान जवानों को दोनों नक्सलियों के शव और हथियार बरामद हुए।
रणनीतिक एंबुश में फंसे नक्सली
- जवानों ने इलाके की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले ही ग्राउंड प्लान तैयार किया था।
- डीआरजी के जवान फ्रंट पर थे।
- बस्तर फाइटर्स और एसटीएफ ने चारों ओर से घेराबंदी की।
नक्सलियों ने पहले फायरिंग की, लेकिन जवानों ने एंबुश बनाकर उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया। तीन घंटे की मुठभेड़ में दोनों बड़े नक्सली मारे गए।

मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता बताया। उन्होंने कहा—
“यह केवल दो बड़े नक्सलियों का खात्मा नहीं, बल्कि बस्तर में शांति और विकास की नई शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद का अंत अब और निकट है।”
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