
Adani Power के Share में 80% की “गिरावट” और अपर सर्किट का मामला: Stock Split का सच
आज, 22 सितंबर 2025 को अडानी पावर के शेयरों में भारी हलचल देखी गई। कई निवेशकों को शेयर की कीमत में करीब 80% की “गिरावट” दिखी, जिससे वे चौंक गए। लेकिन यह कोई वास्तविक गिरावट नहीं थी, बल्कि कंपनी के 1:5 स्टॉक स्प्लिट का नतीजा था। इसके बाद शेयर में 20% का अपर सर्किट भी लगा। आइए, इस पूरे मामले को स्पष्ट और सटीक रूप से समझते हैं।

क्या हुआ: स्टॉक स्प्लिट और कीमत में बदलाव
स्टॉक स्प्लिट का अर्थ: अडानी पावर ने अपने शेयरों को 1:5 के अनुपात में स्प्लिट किया। इसका मतलब है कि प्रत्येक 10 रुपये अंकित मूल्य (face value) वाले शेयर को 5 शेयरों में बांटा गया, जिनका अंकित मूल्य अब 2 रुपये प्रति शेयर हो गया। साथ ही, प्रत्येक शेयर के बदले निवेशकों को 4 अतिरिक्त शेयर मिले।
कीमत में “गिरावट”: शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को शेयर का बंद मूल्य 709.05 रुपये था। स्टॉक स्प्लिट के बाद, सैद्धांतिक रूप से कीमत 1/5 होकर लगभग 141.81 रुपये प्रति शेयर हो गई। आज, शेयर 141.80 रुपये पर खुला, जो तकनीकी रूप से 80% की “गिरावट” दिखाता है। लेकिन यह कोई नुकसान नहीं है, क्योंकि निवेशकों के पास अब 1 शेयर की जगह 5 शेयर हैं, और उनके पोर्टफोलियो का कुल मूल्य वही रहता है।
उदाहरण: अगर किसी निवेशक के पास 10 शेयर थे (709.05 रुपये प्रति शेयर, कुल मूल्य 7,090.50 रुपये), तो स्प्लिट के बाद उनके पास 50 शेयर होंगे (141.81 रुपये प्रति शेयर, कुल मूल्य अभी भी लगभग 7,090.50 रुपये)।
अपर सर्किट क्यों लगा?
20% की तेजी: स्टॉक स्प्लिट के बाद, सोमवार दोपहर को BSE पर अडानी पावर का शेयर 20% या 28.35 रुपये की बढ़त के साथ 170.15 रुपये पर पहुंच गया। यह इसका 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर है, और मार्केट कैप 3,28,129.08 करोड़ रुपये हो गया।
तेजी के कारण:
बढ़ी हुई लिक्विडिटी: स्टॉक स्प्लिट से शेयर की कीमत कम होने के कारण छोटे निवेशकों की पहुंच बढ़ी, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम और मांग में इजाफा हुआ।
सकारात्मक सेंटीमेंट: हाल ही में SEBI ने अडानी ग्रुप के खिलाफ Hindenburg Research के कुछ आरोपों को खारिज किया, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
ब्रोकरेज की सकारात्मक राय: मॉर्गन स्टेनली जैसे ब्रोकरेज हाउस ने अडानी पावर पर “Overweight” रेटिंग दी और 818 रुपये (प्री-स्प्लिट समायोजित) का टारगेट प्राइस सेट किया, जो मौजूदा स्तर से 30% की वृद्धि दर्शाता है।
मजबूत फंडामेंटल्स: कंपनी का 41.9 GW तक पोर्टफोलियो विस्तार और FY33 तक EBITDA में तिगुनी वृद्धि की उम्मीद ने निवेशकों को आकर्षित किया।
स्टॉक स्प्लिट क्यों किया जाता है?
उद्देश्य: जब किसी कंपनी का शेयर मूल्य बहुत अधिक हो जाता है, तो यह छोटे निवेशकों की पहुंच से बाहर हो जाता है। स्टॉक स्प्लिट से प्रति शेयर कीमत कम होती है, जिससे लिक्विडिटी बढ़ती है और ज्यादा निवेशक इसे खरीद सकते हैं।

प्रभाव: शेयरों की संख्या बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता है, जिससे शेयर की कीमत को ऊपर ले जाने में मदद मिलती है। निवेशक के पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू पर कोई असर नहीं पड़ता।
रिकॉर्ड डेट और प्रक्रिया
निर्णय: अडानी पावर के बोर्ड ने अगस्त 2025 में 1:5 स्टॉक स्प्लिट को मंजूरी दी थी। रिकॉर्ड डेट 22 सितंबर 2025 तय की गई थी।
लाभार्थी: जिन निवेशकों के पास 22 सितंबर तक अडानी पावर के शेयर डीमैट खाते में थे, उन्हें स्प्लिट का लाभ मिला।
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