
Chhattisgarh High Court: दिव्यांगों को आरक्षण नीति पर चुनौती, 18 कारों वाले स्टंट मामले में सख्त रुख
बिलासपुर, : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज दो महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। एक ओर दिव्यांगों के लिए आरक्षण नीति को लेकर एक याचिका पर विचाराधीन है, जिसमें राज्य सरकार की नीतियों को चुनौती दी गई है। दूसरी ओर, मस्तूरी रोड पर 18 लग्जरी कारों से स्टंटबाजी करने वाले युवकों के मामले में कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली बेंच ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई और जब्त वाहनों को बिना कोर्ट की अनुमति के रिहा न करने का आदेश दिया। ये फैसले न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक न्याय और सड़क सुरक्षा के मुद्दों को भी रेखांकित करते हैं।

दिव्यांग आरक्षण नीति पर याचिका: राज्य की नीतियां संविधान के विरुद्ध?
दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण प्रदान करने के संबंध में दायर याचिका ने हाईकोर्ट में हलचल मचा दी है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की आरक्षण नीति ‘राइट्स ऑफ पर्सन्स विथ डिसेबिलिटीज एक्ट, 2016’ की धारा 34 का उल्लंघन कर रही है। इस धारा के तहत राज्य को विभिन्न दिव्यांग श्रेणियों के बीच आरक्षण को इंटरचेंज करने का अधिकार है, लेकिन वाणिज्य संकाय के सहायक प्रोफेसर पदों पर दृषि-बाधित उम्मीदवारों को आरक्षण न देने को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि 2019 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) द्वारा जारी 1384 सहायक प्रोफेसर पदों की विज्ञप्ति में दृषि-बाधितों के लिए 2% आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया, जो भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई पद एक श्रेणी के लिए अनुपयुक्त है, तो आरक्षण को दूसरी श्रेणी में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “दिव्यांगों के अधिकार संवैधानिक हैं, और राज्य को इनकी अनदेखी का अधिकार नहीं।” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याचिका स्वीकार हुई, तो यह न केवल वर्तमान भर्तियों को प्रभावित करेगी, बल्कि बैकलॉग रिक्तियों पर भी असर डालेगी। यह मामला 1995 के दिव्यांग अधिनियम से 2016 के नए कानून तक की यात्रा को दर्शाता है, जहां आरक्षण को 3% से बढ़ाकर 4% किया गया।
स्टंटबाजी का मामला: 18 कारें जब्त, कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार
दूसरे मामले में, हाईकोर्ट ने मस्तूरी रोड पर युवाओं द्वारा 18 लग्जरी कारों से खतरनाक स्टंटबाजी करने के वीडियो को देखते हुए सख्त रुख अपनाया। जुलाई 2025 में सामने आए इस घटना में छह युवक टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी महंगी कारों से हाईवे पर स्टंट करते हुए ट्रैफिक जाम पैदा कर रहे थे, जिससे सड़क सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 18 कारें जब्त कीं और चालकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की, लेकिन केवल 2000 रुपये का जुर्माना लगाकर उन्हें छोड़ दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्टंटबाजों को सजा मिलनी चाहिए, न कि मामूली जुर्माने से छूट।” कोर्ट ने आदेश दिया कि जब्त 18 कारों को बिना अदालती अनुमति के रिहा न किया जाए। इसके अलावा, मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा गया है, जिसमें सड़क सुरक्षा उपायों और ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए ठोस कदमों का विवरण हो।
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