
Chhattisgarh High Court का ऐतिहासिक फैसला: 40 साल पुराने 100 रुपये रिश्वत मामले में बिल असिस्टेंट बरी
बिलासपुर, 19 सितंबर 2025, शाम 7:28 बजे: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने एक रिश्वत मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रायपुर के मध्य प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MPSRTC) के बिल असिस्टेंट रामेश्वर प्रसाद अवधिया को बरी कर दिया है। यह मामला 100 रुपये की रिश्वत से जुड़ा था, और 40 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अवधिया को न्याय मिला है।

100 रुपये रिश्वत का मामला
वर्ष 1985 में, रामेश्वर प्रसाद अवधिया, जो उस समय MPSRTC, रायपुर में बिल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे, पर लोकायुक्त ने 100 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। यह रिश्वत कथित तौर पर एक बिल की मंजूरी के बदले मांगी गई थी। लोकायुक्त की टीम ने स्टिंग ऑपरेशन के तहत अवधिया को रंगे हाथों पकड़ा था। निचली अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
40 साल की कानूनी लड़ाई
इस मामले में रामेश्वर प्रसाद अवधिया ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए 40 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। कई स्तरों पर अपील और सुनवाई के बाद, मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा और रिश्वत के आरोप को पूरी तरह साबित नहीं कर सका। इस आधार पर, कोर्ट ने अवधिया को बरी करने का फैसला सुनाया।
न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
इस फैसले ने एक बार फिर लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और जांच की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। 40 साल तक चले इस मामले ने न केवल अवधिया के जीवन को प्रभावित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि प्रशासनिक और न्यायिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि भविष्य में ऐसी देरी से बचा जाए।
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