
CGPSC घोटाला: भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ने में CBI की बड़ी सफलता,पांच प्रमुख आरोपियों किया गिरफ्तार
रायपुर, 19 सितंबर 2025 – छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षा घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की। पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव समेत पांच प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारियां घोटाले के नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) और रिश्वतखोरी के आरोपों को मजबूत करती हैं, जिससे राज्य की नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं।

सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई 2020-2022 के बीच हुई भर्तियों से जुड़ी है, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों के परिजनों को डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति दिलाने के लिए मेरिट लिस्ट में हेराफेरी की। गिरफ्तार आरोपियों को शनिवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां रिमांड की मांग की जाएगी।

घोटाले का पर्दाफाश: नेपोटिज्म और रिश्वत का जाल
सीजीपीएससी घोटाला पहली बार 2023 में तब सुर्खियों में आया जब 2021 की परीक्षा के परिणाम घोषित हुए। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने आरोप लगाया कि मेरिट लिस्ट में अधिकारियों और राजनेताओं के परिजनों को अनुचित लाभ दिया गया। मई 2024 में बालोद जिले के अर्जुंदा थाने में दर्ज एफआईआर में तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के नाम प्रमुखता से शामिल थे।

जांच में सामने आया कि सोनवानी ने अपने बेटे नितेश को डिप्टी कलेक्टर, भतीजे साहिल को डिप्टी एसपी और भतीजी सुनीता जोशी को लेबर ऑफिसर बनवाया। इसी तरह, ध्रुव ने अपने बेटे सुमित को डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित कराया। इसके अलावा, पूर्व गवर्नर के सचिव अमृत खलखो के बच्चों और कुछ औद्योगिक घरानों के वारिसों को भी लाभ पहुंचाया गया।
सीबीआई ने नवंबर 2024 में सोनवानी को 45 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जो रायपुर स्थित एक स्टील कंपनी के निदेशक से लिया गया था। कंपनी के चेयरमैन एसके गोयल को भी उसी महीने गिरफ्तार किया गया। कुल मिलाकर, यह घोटाला राज्य की 2022 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसके परिणाम मई 2023 में घोषित हुए थे।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची: प्रमुख नाम और भूमिकाएं
सीबीआई ने शुक्रवार को निम्नलिखित पांच आरोपियों को हिरासत में लिया:
- आरती वासनिक: रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व परीक्षा नियंत्रक। राजनांदगांव स्थित उनके आवास पर छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए, जो घोटाले में उनकी संलिप्तता को साबित करते हैं।
- सुमित ध्रुव: पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव के बेटे, जो डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए। वे मेरिट लिस्ट में हेराफेरी के प्रमुख लाभार्थी माने जाते हैं।
- जीवन किशोर ध्रुव: रिटायर्ड आईएएस और पूर्व पीएससी सचिव। उनके परिवार को लाभ पहुंचाने के आरोप में पहले से जांच के दायरे में थे।
- निशा कोसले: सोनवानी के दामाद की पत्नी, जो डिप्टी कलेक्टर बनीं। नेपोटिज्म के केस में नाम शामिल।
- अन्य एक आरोपी: जांच स्रोतों के अनुसार, यह व्यक्ति घोटाले के मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, हालांकि नाम अभी गोपनीय रखा गया है।
ये गिरफ्तारियां सीबीआई की छापेमारी अभियान का हिस्सा हैं, जो जुलाई 2024 से चल रहा है। रायपुर और भिलाई में कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन के दौरान डिजिटल सबूत और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए गए।
सीबीआई की जांच: आगे की संभावनाएं और राज्य पर प्रभाव
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि जांच अभी जारी है और और अधिक गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है, जिसमें रिश्वत, मेरिट हेराफेरी और संपत्ति अर्जन के आरोप शामिल होंगे। सोनवानी पर रायपुर, सूरगुजा सहित कई जिलों में रियल एस्टेट निवेश के आरोप भी लगे हैं, जो घोटाले से जुड़े धन के स्रोत हो सकते हैं।
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