
NHM कर्मचारियों की लंबी लड़ाई का अंत: हड़ताल समाप्त,
रायपुर, 19 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों की करीब 33 दिनों से चली आ रही अनिश्चितकालीन हड़ताल आज समाप्ति की ओर है। लगभग 16 हजार कर्मचारियों की इस लड़ाई ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था, लेकिन लंबी वार्ताओं के बाद सरकार ने उनकी अधिकांश मांगों पर सहमति जता दी है। आज दोपहर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एक बड़ा ऐलान करने वाले हैं, जिसमें हड़ताल समाप्ति और कर्मचारियों के काम पर लौटने की औपचारिक घोषणा शामिल हो सकती है।

हड़ताल की पृष्ठभूमि: 10 सूत्रीय मांगों से शुरू हुआ आंदोलन
एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन 18 अगस्त 2025 को शुरू हुआ था, जब 16 हजार से अधिक संविदा स्वास्थ्य कर्मी ‘काम बंद, कलम बंद’ के तहत अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर आए। इन कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से संविदा से नियमितिकरण, वेतन वृद्धि (कम से कम 27 प्रतिशत), ग्रेड पे का निर्धारण, मेडिकल बीमा की सुविधा, प्रमोशन में पारदर्शिता, पेंशन और अन्य लाभ शामिल थे। 13 अगस्त को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में इन मांगों पर चर्चा हुई थी, जहां 5 मांगों पर सहमति बनी और आदेश भी जारी कर दिए गए। लेकिन शेष 5 मांगों पर असहमति के कारण कर्मचारी काम पर नहीं लौटे।
हड़ताल के पहले चरण में कर्मचारियों ने 15 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कोई सकारात्मक फैसला न आने पर आंदोलन तेज हो गया। रायपुर के तूता धरना स्थल पर हजारों कर्मचारी जुटे, जहां उन्होंने धरना, प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन जैसे कदम उठाए। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा को जाहिर करने के लिए अनोखे तरीके अपनाए—25 अगस्त को उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को खून से लिखा पत्र भेजा, जिसमें नियमितिकरण और वेतन बढ़ोतरी की गुहार लगाई। यहां तक कि तीजा जैसे पारंपरिक पर्व पर भी महिलाएं धरने में डटी रहीं, जो उनकी दृढ़ता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट: मरीजों की परेशानी बढ़ी
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण अभियान, ओपीडी सेवाएं और अन्य चिकित्सा कार्य पूरी तरह ठप हो गए। गरियाबंद में तो एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें महिला गार्ड मरीज को इंजेक्शन लगा रही थी, जबकि धतरई के सरकारी हेल्थ सेंटर पर कुत्तों ने कब्जा जमा लिया। पेंड्रा में स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटक गया। लगभग एक माह तक चली इस हड़ताल ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘वेंटिलेटर’ पर ला खड़ा किया, जहां मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयान न आने पर सवाल उठाए।
सरकार का सख्त रुख: बर्खास्तगी और अल्टीमेटम
सरकार ने हड़ताल को ‘नियम विरुद्ध’ बताते हुए सख्त कदम उठाए। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने 29 अगस्त को सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को निर्देश दिए कि काम पर न लौटने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाए। पहले चरण में 3 सितंबर को 25 अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गईं, जिनमें संगठन के प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी भी शामिल थे। इसके बाद 16 सितंबर तक काम पर लौटने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया, लेकिन कर्मचारियों के न लौटने पर बर्खास्तगी की संख्या बढ़कर 794 हो गई। सूरजपुर में 594, बलौदाबाजार में 160, बिलासपुर में 106 और कोरबा में 21 कर्मचारी प्रभावित हुए। कटारिया ने गुरुवार रात साढ़े 11 बजे व्हाट्सएप के जरिए निर्देश जारी किए: “जो कर्मचारी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए। सभी सीएमएचओ शुक्रवार तक खाली पदों की सूची तैयार करें और नई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू करें।”
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



