
America में भारतीय इंजीनियर की हत्या: नस्लीय भेदभाव पर गहराया विवाद
वॉशिंगटन/हैदराबाद, 19 सितंबर 2025: कैलिफोर्निया के सांता क्लारा में एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर मोहम्मद निजामुद्दीन की पुलिस फायरिंग में मौत के बाद अमेरिका में नस्लीय भेदभाव का मुद्दा फिर से गरमा गया है। 30 वर्षीय निजामुद्दीन, जो तेलंगाना के महबूबनगर जिले के रहने वाले थे, को इस महीने की शुरुआत में पुलिस ने गोली मार दी थी। घटना के पीछे कथित तौर पर उनके रूममेट पर चाकू से हमला करने का प्रयास था, लेकिन परिवार का दावा है कि यह सब नस्लीय उत्पीड़न और कार्यस्थल पर भेदभाव का नतीजा था। निजामुद्दीन की मौत ने न केवल भारतीय समुदाय को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि अमेरिकी प्रवासी नीतियों और नस्लीय हिंसा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजामुद्दीन का जीवन: सपनों का सफर जो बन गया दर्दनाक अंत
मोहम्मद निजामुद्दीन एक शांत स्वभाव के धार्मिक व्यक्ति थे, जैसा कि उनके परिवार ने उन्हें हमेशा वर्णित किया। महबूबनगर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले निजामुद्दीन ने फ्लोरिडा के एक कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। अमेरिका पहुंचने के बाद उन्होंने सांता क्लारा स्थित एक प्रमुख टेक फर्म में नौकरी शुरू की, जो गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए सेवाएं प्रदान करती है। विशेष रूप से, वे ईपीएएम सिस्टम्स (EPAM Systems) नामक कंपनी में काम कर रहे थे, जो गूगल क्लाउड की पार्टनर है। कंपनी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईपीएएम ग्लोबल स्तर पर 50,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ काम करती है, लेकिन निजामुद्दीन का अनुभव इससे बिल्कुल उलट था।
परिवार के अनुसार, निजामुद्दीन अमेरिका में ‘अमेरिकन ड्रीम’ जीने आए थे, लेकिन उन्हें नस्लीय पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ा। उनके भाई ने एनडीटीवी को बताया, “वह बहुत शांत और धार्मिक था। वह कभी किसी से झगड़ा नहीं करता था। लेकिन अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय हमले बढ़ गए हैं, और हम महसूस करते हैं कि यह एक हेट क्राइम है।” परिवार ने विदेश मंत्रालय से शव भारत लाने में मदद की अपील की है, और वे चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो।

घटना का क्रम: उत्पीड़न से हिंसा तक का दर्दनाक सफर
घटना 2025 के सितंबर के पहले सप्ताह में घटी, जब सांता क्लारा पुलिस को एक आपातकालीन कॉल मिली। अधिकारियों के मुताबिक, निजामुद्दीन ने अपने रूममेट पर चाकू से हमला करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने उन पर गोली चला दी। रूममेट को मामूली चोटें आईं, लेकिन निजामुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, परिवार का कहना है कि निजामुद्दीन ने खुद ही पुलिस को फोन किया था मदद के लिए, और गोली चलाना अतिरिक्त बल प्रयोग था।
इससे पहले निजामुद्दीन ने लिंक्डइन पर एक लंबा पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने दर्द को बयां किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं नस्लीय घृणा, नस्लीय भेदभाव, उत्पीड़न, यातना, वेतन धोखाधड़ी, गलत तरीके से नौकरी से निकालने और न्याय में बाधा का शिकार हुआ हूं।” उन्होंने कंपनी पर आरोप लगाया कि उन्हें श्रम विभाग के नियमों के मुताबिक वेतन नहीं दिया गया, और उन्हें रेसियल हैरासमेंट का सामना करना पड़ा। पोस्ट में उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खाने में जहर मिलाया गया, उन्हें घर से बेदखल किया गया, और एक कथित जासूस द्वारा निगरानी और धमकी दी गई। अंत में उन्होंने लिखा, “बस बहुत हो गया। व्हाइट सुप्रीमेसी और रेसिस्ट व्हाइट अमेरिकन मानसिकता को समाप्त होना चाहिए। कॉर्पोरेट अत्याचार का दमन खत्म हो।”
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