
“Delhi के परिवारों पर असर: लिंगानुपात, जन्मदर और स्वास्थ्य संकट की नई चुनौतियाँ”
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लिंगानुपात और जन्मदर दोनों में गिरावट आई है, जबकि मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई है।

आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय और दिल्ली सरकार के मुख्य पंजीयक कार्यालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में प्रति 1000 लड़कों पर 933 लड़कियां पैदा हो रही थीं, जो 2024 तक घटकर 920 रह गई हैं। कोविड महामारी के बाद यह गिरावट लगातार जारी है, जो सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही है।
रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि दिल्ली में जन्म दर 2023 में 14.66 प्रति हजार जनसंख्या थी, जो 2024 में घटकर 14 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 6.16 से बढ़कर 6.37 हो गई है। इसका मतलब है कि प्रति हजार लोगों पर जन्म कम और मृत्यु अधिक हो रही है। हालांकि, शिशु और मातृ मृत्यु दर में हल्की गिरावट आई है, जो स्वास्थ्य सेवा में सुधार का संकेत है।
दिल्ली में अधिकांश बच्चों का जन्म संस्थागत रूप से हो रहा है, क्योंकि कुल जन्मों में से 96.09% संस्थागत डिलीवरी है, जबकि मात्र 3.91% बच्चे घर पर जन्म लेते हैं। माताओं की उम्र के अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश महिलाओं की उम्र 25 से 29 वर्ष के बीच होती है, जो प्रजननशील आयु वर्ग में सामान्य है।

देश स्तर पर भी इसी तरह के आंकड़े देखने को मिलते हैं। भारत में जन्म के समय लिंगानुपात 929 से 933 लड़कियों के बीच होता है प्रति 1000 लड़कों के मुकाबले। देश की जन्म दर 2023 में लगभग 18.4 प्रति 1000 थी, और मृत्यु दर 6.4 प्रति 1000। दिल्ली में प्रति महिला जन्म दर 1.2 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 2.1 के आसपास है।
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