
Chhattisgarh बस्तर फाइटर के जवान की दर्दनाक मौत, कार और Bike की भीषण टक्कर में गई जान
बीजापुर, 15 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर में एक दुखद सड़क हादसे ने सबको स्तब्ध कर दिया है। बस्तर फाइटर के एक बहादुर जवान रामकृष्ण ककेम की कार और बाइक की टक्कर में मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के महादेवघाट के पास हुई, जहां जवान अपनी ड्यूटी से जुड़े कार्य के लिए यात्रा कर रहे थे। इस हादसे ने न केवल उनके परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है, बल्कि पूरे पुलिस बल में शोक की लहर दौड़ा दी है।

घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार, रामकृष्ण ककेम आज सुबह अपनी मोटरसाइकिल से आवापल्ली से बीजापुर की ओर जा रहे थे। महादेवघाट के पास एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक पूरी तरह से चकनाचूर हो गई और कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना भयानक था कि जवान को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोतवाली थाने की टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कार चालक की लापरवाही और तेज गति इस हादसे का मुख्य कारण हो सकती है। कार चालक को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने मौत की पुष्टि की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है, और गांव में मातम पसरा हुआ है।

जवान की पृष्ठभूमि और योगदान
रामकृष्ण ककेम मूल रूप से बीजापुर जिले के ग्राम इलमिडी, कसारामपारा के निवासी थे। वे बस्तर फाइटर के एक समर्पित सदस्य थे, जो छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष इकाई है। बस्तर फाइटर मुख्य रूप से स्थानीय आदिवासी युवाओं से गठित है, जो नक्सलवाद के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर लड़ते हैं। रामकृष्ण ने कई ऑपरेशनों में हिस्सा लिया था और उनकी बहादुरी के किस्से विभाग में मशहूर थे। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले थे, जिसमें पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता शामिल हैं। उनके निधन से परिवार पर आर्थिक संकट भी मंडरा रहा है।
बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद एक बड़ी चुनौती है, और बस्तर फाइटर जैसे बल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह इकाई 2021 में गठित की गई थी, और इसमें शामिल जवान स्थानीय भाषा, भूगोल और संस्कृति से परिचित होने के कारण प्रभावी रूप से काम करते हैं। रामकृष्ण जैसे जवान न केवल सुरक्षा बलों का हिस्सा हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं।
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