
New Delhi:सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के प्रावधानों पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 14 सितंबर 2025: सर्वोच्च न्यायालय ने आज वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए दो प्रमुख प्रावधानों को स्थगित करने का आदेश दिया, जब तक कि इनके कार्यान्वयन के लिए उचित तंत्र स्थापित नहीं हो जाता।

धारा 3(1)(आर) पर रोक
न्यायालय ने वक्फ अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के प्रावधान को स्थगित कर दिया, जिसमें यह अनिवार्य किया गया था कि वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति को कम से कम 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना चाहिए। पीठ ने कहा कि जब तक राज्य सरकारें यह निर्धारित करने के लिए स्पष्ट नियम और तंत्र नहीं बनातीं कि कोई व्यक्ति 5 वर्षों या उससे अधिक समय से इस्लाम का अनुयायी है या नहीं, तब तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा। न्यायालय ने इस प्रावधान को “शक्ति के मनमाने प्रयोग” को बढ़ावा देने वाला माना, क्योंकि इसके बिना व्यक्तियों के अधिकारों का दुरुपयोग हो सकता है।

धारा 3सी की उप-धारा 2 पर भी अंकुश
सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 3सी की उप-धारा 2 के प्रावधान पर भी रोक लगा दी, जो किसी सरकारी अधिकारी को यह तय करने की शक्ति देता है कि क्या वक्फ संपत्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है। पीठ ने इसे शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए कहा कि किसी कार्यकारी अधिकारी को नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों से संबंधित मामलों का न्यायनिर्णयन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस प्रावधान पर रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक कि ट्रिब्यूनल द्वारा इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता।
कानूनी और सामाजिक प्रभाव
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके दुरुपयोग को लेकर चल रही बहस को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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