
Chhattisgarh में 700 पेड़ प्रति बच्चे की अनुमति प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उठाया बड़ा कदम
15 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अभूतपूर्व और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील निर्णय लिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने घोषणा की है कि प्रत्येक बच्चे के लिए 700 पेड़ लगाने की अनुमति प्रदान की जाएगी। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह बच्चों को प्रकृति के साथ जोड़ने और उन्हें जिम्मेदारी का पाठ सिखाने का भी प्रयास है। यह योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी, ताकि हर बच्चे को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाया जा सके।

योजना के मुख्य बिंदु
- प्रत्येक बच्चे के लिए 700 पेड़: राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने का फैसला किया है कि हर बच्चे के नाम पर 700 पेड़ लगाए जाएं। यह पेड़ विभिन्न प्रजातियों के होंगे, जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों।
- शिक्षकों और सहायक स्टाफ की भूमिका: प्रत्येक स्कूल में सहायक शिक्षकों और कर्मचारियों की सहायता से इस अभियान को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। 625 सहायक शिक्षकों और 35 पेड़ प्रति शिक्षक की दर से इस कार्य को अंजाम दिया जाएगा।
- महिलाओं और छात्रों की भागीदारी: इस पहल में महिलाओं और छात्रों को भी शामिल किया जाएगा। स्कूलों में गणवेश और खेल कूद के मैदान में पेड़ लगाने के साथ-साथ अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
- अधिकारी और कर्मचारी: प्रत्येक 25 पेड़ प्रति बच्चे की देखरेख के लिए अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पेड़ सही तरीके से पलें और संरक्षित हों।
पर्यावरण और शिक्षा में लाभ
यह योजना न केवल पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाएगी, बल्कि बच्चों को शारीरिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा भी प्रदान करेगी। पेड़ लगाने की प्रक्रिया में बच्चों को जिम्मेदारी, टीम वर्क और प्रकृति के प्रति सम्मान सिखाया जाएगा। इसके अलावा, यह कदम वायु प्रदूषण को कम करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी सहायक होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस योजना को लागू करने के पीछे अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। उनके अनुसार, “छत्तीसगढ़ को हरा-भरा बनाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।” इस पहल से राज्य में शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।
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