
Chhattisgarh High Court ने बिजली करंट से बच्चों की मौत पर जताई कड़ी नाराजगी, मुख्य सचिव को नोटिस
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिजली करंट लगने से दो मासूम बच्चों की मौत के मामलों को अत्यंत गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को छुट्टी के बावजूद पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार को ठोस रोडमैप और नीति बनाने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

दो मासूमों की करंट से मौत
हाईकोर्ट ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और कोंडागांव जिले में हुई दो अलग-अलग घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। पहली घटना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के करगीकला गांव की है, जहां 6 वर्षीय बच्चा खेत के पास खेलते समय बिजली के तार की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। दूसरी घटना कोंडागांव जिले में हुई, जहां ढाई वर्षीय मासूम महेश्वरी यादव बिजली करंट की शिकार हो गई। कोर्ट ने इन घटनाओं को सरकारी लापरवाही का परिणाम बताते हुए सख्त नाराजगी जाहिर की।

केवल निलंबन पर्याप्त नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए केवल संबंधित कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब देने का आदेश दिया। साथ ही, कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को अब तक दिए गए मुआवजे का पूरा ब्योरा भी मांगा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
खेतों में बिजली तारों का खतरा
हाईकोर्ट ने राज्य में खेतों की बाड़बंदी पर बिजली के तार लगाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों के कारण न केवल इंसानों, बल्कि पशुओं और वन्यजीवों की जान भी खतरे में पड़ रही है। बरसात के मौसम में पानी भरने से यह खतरा और बढ़ जाता है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
महाधिवक्ता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पीएस एल्मा ने सभी जिलों के कलेक्टरों और अधिकारियों को निर्देश जारी किए। पत्र में कहा गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चे आते हैं, जिन्हें माता-पिता सुरक्षित मानकर सौंपते हैं। लापरवाही के कारण बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है। सभी अधिकारियों, कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, पर्यवेक्षकों, परियोजना अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का गहन निरीक्षण करें और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
सरकार पर बढ़ा दबाव
हाईकोर्ट के इस कदम से छत्तीसगढ़ सरकार पर बिजली करंट से होने वाली मौतों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं और मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं पर तत्काल अंकुश लगाया जाए। कोर्ट के निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में प्रभावी नीति और कार्रवाई लागू करेगी
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