
MP High Court का ऐतिहासिक फैसला: फांसी की सजा निरस्त, गिरधानी सोनवाने को बरी
मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने बालाघाट जिले में दो साल पुराने दोहरे हत्याकांड व दुष्कर्म के आरोप में मृत्युदंड की सजा पाए गिरधानी सोनवाने को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने पाया कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां थीं और आरोप साबित करने वाले साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे।

मामला अप्रैल 2022 का है, जब बालाघाट के चिटका देवरी गांव के एक नहर में तीन और पांच साल की दो मासूम बहनों के शव मिले थे। पुलिस ने यह मान लिया था कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या की गई है। इस आधार पर बालाघाट की जिला अदालत ने सोनवाने को फांसी की सजा सुनाई थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि एक निर्दोष को लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। अदालत ने दिखाया कि गवाहों के बयान विसंगतिपूर्ण थे और जांच में कई कमियां थीं। इसी आधार पर सोनवाने को बरी करते हुए उसे 3 वर्ष 6 माह जेल में अनुचित रूप से रखने के एवज में 1 लाख रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया गया, जिसका भुगतान पुलिस अधिकारियों से वसूल किया जाएगा।
यह निर्णय न केवल एक निर्दोष व्यक्ति के हकों की रक्षा करता है, बल्कि अदालत ने पुलिस जांच में सुधार की भी कड़ी चेतावनी दी है। न्यायतंत्र में साबित साक्ष्यों के बिना सजा देना अनुचित है, यह हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया।

इस ऐतिहासिक फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मृत्युदंड जैसी कठोर सजा तभी दी जानी चाहिए जब अपराध की गम्भीरता और साक्ष्यों की पुष्टि ‘रेस्ट ऑफ रेर’ कैटेगरी में आए।
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