
JNU Medical Collage पीछे, NEET टॉपर्स एम्स, BHU समेत दूसरे राज्यों में दाखिला
नीट यूजी 2023 के टॉप 10 में से 6 टॉपर्स ने पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNU Medical College) में प्रवेश नहीं लिया है।

ये टॉपर्स एम्स, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) समेत अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करने चले गए हैं। यह स्थिति पिछले साल भी देखी गई थी, जब टॉप 2, 4 और 5 नंबर पर रहने वाले छात्रों ने नेहरू मेडिकल कॉलेज की च्वाइस फिलिंग नहीं की थी। 2023 में तो टॉप 10 में से किसी ने भी इस कॉलेज में प्रवेश नहीं लिया था।
चर्चा में यह बात भी है कि इन छात्रों ने नेहरू मेडिकल कॉलेज में विकल्प रखा था, यानी अगर दूसरे राज्यों के संस्थानों में मौका नहीं मिलता तो प्रवेश ले सकते थे। लेकिन उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रवेश मिल जाने के कारण यहां दाखिला नहीं लेना पड़ा। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका मतलब यह नहीं कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज कम गुणवत्ता के हैं, बल्कि छात्र बेहतर अवसरों का फायदा उठाते हैं।
प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के लिए पहले चरण की काउंसलिंग 23 अगस्त को पूरी हुई, जिसमें एमबीबीएस की आवंटित 1534 में से 1396 और बीडीएस की 454 में से 284 छात्रों ने प्रवेश लिया। दूसरे राउंड की काउंसलिंग की तारीख में देरी हुई है, जो अब 13 सितंबर तक चलने वाली थी लेकिन अभी नया शेड्यूल आने वाला है।
रायपुर व भिलाई के चार निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों की एडमिशन प्रक्रिया नवा रायपुर के हेल्थ साइंस विश्वविद्यालय कैंपस में हो रही है, जिसमें कुछ विरोध भी सामने आया है। इस कैंपस में दाखिला लेने को लेकर सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं।

डॉ. विष्णु दत्त, रिटायर्ड डीएमई छत्तीसगढ़ के अनुसार, टॉपर्स के दूसरे राज्यों की प्रीमियर संस्थानों में प्रवेश लेने का मतलब यह नहीं कि नेहरू मेडिकल कॉलेज खराब है। यह दिखाता है कि उन्हें एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से मौका मिल रहा है।
यह भी ध्यान दें कि निजी कॉलेजों में प्रवेश पहले राउंड में अनिवार्य नहीं है, केवल दस्तावेज सत्यापन जरूरी होता है। कुछ छात्र बेहतर कॉलेज मिलने पर दूसरे राउंड में प्रवेश लेंगे।
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