
Madhya Pradesh सरकारी अस्पतालों में चूहों का आतंक, मरीजों की जान पर खतरा
मध्यप्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में चूहों का बुरा हाल है। मंदसौर जिला अस्पताल में चूहों के बिल वार्डों से अधिक पाए गए हैं।

यहां पीडियाट्रिक, गायनिक सहित कई वार्डों में चूहों की धमाचौकड़ी मरीजों को परेशान कर रही है। शिशु वार्ड और बाल चिकित्सा गहन इकाई में भी चूहों ने बिल बना लिए हैं। महिला वार्ड के बरामदे में बारिश का पानी भी टपक रहा है। सीएस डॉ. बीएल रावत ने कहा है कि पेस्ट कंट्रोल का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) की कहानी भी कम दिल दहला देने वाली नहीं है। यहां कई पीढ़ियों से चूहों का आतंक जारी है, जिससे नवजात बच्चों की मौत समेत संक्रमण का खतरा बना हुआ है। अस्पताल में 30 साल से चूहों के खिलाफ दो बड़े अभियान चलाए जा चुके हैं और करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, फिर भी समस्या जमी हुई है। नवजातों की मौत के मामले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंचे हैं।
दमोह जिला अस्पताल में भी मरीज चूहों, कॉकरोच और मवेशियों के आतंक से जूझ रहे हैं। अनुपयुक्त सफाई, टूटी छत और खराब बिस्तर जैसी समस्यायें मरीजों के लिए पीड़ा का सबब बनी हैं। मुरैना, कटनी, रतलाम, श्योपुर, शिवपुरी सहित अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी और लापरवाही पाई गई है। कुत्ते और आवारा मवेशी भी अस्पतालों के परिसर में आम दिखाई देते हैं, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

राज्य सरकार की ओर से पेस्ट कंट्रोल का प्रयास तो हो रहा है, लेकिन लगातार आ रही रिपोर्ट्स ये दर्शाती हैं कि वह पर्याप्त और प्रभावी नहीं है। अस्पताल संरचनाओं में सुधार, नियमित सफाई और रोडेंट नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम लेने की जरूरत बढ़ गई है, नहीं तो मरीजों की जिंदगी खतरे में रहेगी।
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