
दंतेवाड़ा में नक्सलियों का कायराना हमला: प्रेशर IED ब्लास्ट में CRPF इंस्पेक्टर और आरक्षक घायल,
दंतेवाड़ा, 11 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों की कायराना हरकत ने एक बार फिर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। मालेवाही थाना क्षेत्र के सातधार पुल के आगे नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के धमाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर करने का फैसला किया।

दोनों जवानों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया जाएगा।
घटना की जानकारी के अनुसार, यह हादसा आज सुबह करीब 7 बजे के आसपास हुआ, जब CRPF की 195 वाहिनी की एक कंपनी मुख्यालय से नक्सल विरोधी अभियान के तहत रवाना हुई थी। यह टीम सातधार और मालेवाही के बीच के घने जंगलों में एरिया डोमिनेशन (क्षेत्रीय नियंत्रण) और डिमाइनिंग (बम निष्क्रिय करने) की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा सड़क किनारे छिपाकर लगाए गए प्रेशर आईईडी पर जवानों का पैर पड़ते ही जोरदार धमाका हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि आसपास के पेड़-पौधे उड़ गए और धूल का गुबार छा गया।
घायल जवानों की पहचान इंस्पेक्टर दीवान सिंह गुर्जर और आरक्षक आलम मुनेश के रूप में हुई है। दोनों 195 वाहिनी के अनुभवी जवान हैं, जो लंबे समय से बस्तर क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन अभियान में सक्रिय हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंस्पेक्टर गुर्जर को पैर और धड़ में चोटें आई हैं, जबकि आरक्षक मुनेश को छर्रों से कई जगह घाव हुए हैं। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों की हालत स्थिर है, लेकिन IED के धमाके के कारण आंतरिक चोटों की आशंका बनी हुई है। स्थानीय अस्पताल में सीमित संसाधनों के कारण उन्हें रायपुर के अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाओं वाले अस्पताल में स्थानांतरित किया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही दंतेवाड़ा पुलिस और CRPF की अतिरिक्त टीमें मौके पर पहुंचीं। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। नक्सलियों के फरार होने की आशंका को देखते हुए ड्रोन और हेलीकॉप्टरों का भी सहारा लिया जा रहा है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने बताया कि यह नक्सलियों की हताशा का परिणाम है, जो लगातार हो रहे अभियानों से बौखला गए हैं। हालांकि, उन्होंने IED के स्रोत और नक्सलियों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।
दंतेवाड़ा और बस्तर का यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा का केंद्र रहा है। यहां की घनी जंगल और दुर्गम भौगोलिक स्थिति नक्सलियों के लिए IED जैसे घातक हथियारों को छिपाने का आदर्श स्थान प्रदान करती है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जहां नक्सलियों ने प्रेशर IED का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों पर हमला किया। उदाहरण के तौर पर, फरवरी 2025 में दंतेवाड़ा के अरनपुर क्षेत्र में CRPF के 231 बटालियन के एक जवान को इसी तरह के धमाके में चोट लगी थी। इसी तरह, जुलाई 2025 में बीजापुर जिले में दो CRPF जवान IED ब्लास्ट में घायल हुए थे। ये घटनाएं नक्सल उन्मूलन अभियान की चुनौतियों को उजागर करती हैं।
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