
Sarguja सौर सुजला योजना: खेतों में निर्बाध सिंचाई से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि
निलमणि पाल
सरगुजा। छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रजत महोत्सव मना रहा है। इस अवसर पर राज्य की कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति का जायजा लेना स्वाभाविक है। पिछले दो दशकों से अधिक समय में छत्तीसगढ़ ने कृषि उत्पादकता, सिंचाई सुविधाओं और किसानों की आय में निरंतर सुधार किया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में सौर सुजला योजना एक प्रमुख कदम साबित हुई है, जो किसानों को सौर ऊर्जा आधारित स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान कर रही है। यह योजना न केवल खेतों में पानी की कमी को दूर कर रही है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सौर सुजला योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2018 में शुरू की गई एक क्रांतिकारी पहल है, जो सौर पैनलों से संचालित पंपों के माध्यम से किसानों को निर्भरता-मुक्त सिंचाई उपलब्ध कराती है। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को सब्सिडी पर सौर पंप लगाए जाते हैं, जिससे वे बिजली की अनियमितता या डीजल पंपों की ऊंची लागत से मुक्त हो जाते हैं। राज्य में अब तक हजारों किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में यह योजना विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना से जुड़े किसानों की फसल उत्पादकता में औसतन 30-50% की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि सिंचाई लागत में 60% तक की कमी आई है। यह न केवल पर्यावरण अनुकूल है, बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत साल्ही के किसान अमृत सिंह इस योजना के जीवंत उदाहरण हैं। 45 वर्षीय अमृत सिंह, जो पारंपरिक रूप से धान की खेती पर निर्भर थे, अब अपनी 5 एकड़ भूमि पर विविध फसलें उगा रहे हैं। उन्होंने बताया, “पहले सिंचाई के लिए बिजली की समस्या हमेशा बनी रहती थी। गर्मियों में बिजली कटौती के कारण फसलें सूख जाती थीं, और डीजल पंप चलाने का खर्च आर्थिक बोझ बन जाता था। पैदावार कम होने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाता था। लेकिन सौर सुजला योजना से सब कुछ बदल गया।”

अमृत सिंह को योजना के तहत एक 5 एचपी का सौर पंप लगाया गया, जो उनके खेत में बोरवेल से सीधे पानी खींचता है। अब वे न केवल धान की दो फसलें ले रहे हैं, बल्कि सब्जियां जैसे टमाटर, भिंडी, बैंगन और पालक जैसी नकदी फसलें भी उगा रहे हैं। “साल भर खेती संभव हो गई है। पहले हम केवल मानसून पर निर्भर थे, लेकिन अब सूरज की रोशनी ही हमारी बिजली है। फसल उत्पादन दोगुना हो गया है, और सब्जियों की बिक्री से मासिक आमदनी 20-25 हजार रुपये तक पहुंच गई है। पहले यह आधी भी नहीं थी,” अमृत सिंह ने उत्साह से कहा।
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