
Chhattisgarh गांजा तस्करी के दोषी रवि शंकर लोढी और मनु केउंट को 10-10 वर्ष की सजा, 1 लाख जुर्माना
रायपुर, 8 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत ने नशीले पदार्थों से जुड़े एक गंभीर मामले में दो तस्करों को कड़ी सजा सुनाई है। विशेष दंडिक प्रकरण (एन.डी.पी.एस.) क्र. 71/2023 के तहत, आरोपी रवि शंकर लोढी और मनु केउंट उर्फ सोनू को गांजा तस्करी के आरोप में दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है। इसके अलावा, प्रत्येक आरोपी पर 1-1 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि आरोपी अर्थदंड का भुगतान करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 2-2 वर्ष का कारावास भुगतना पड़ेगा।

यह फैसला रायपुर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज सिन्हा की अदालत में सुनाया गया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर दोषसिद्धि तक का न्यायिक अभिरक्षा में बिताया गया समय सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। यह फैसला न केवल आरोपी व्यक्तियों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे राज्य में नशीली दवाओं की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए एक मजबूत संदेश भी देता है।
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
यह मामला छत्तीसगढ़ रेलवे पुलिस (जीआरपी) के दायरे में आता है। जांच के अनुसार, 2 मार्च 2023 को रायपुर जीआरपी पुलिस को एक मुखबिर से महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने तस्करी की आशंका वाले संदिग्धों पर निगरानी बढ़ाई। हालांकि, तलाशी वारंट प्राप्त करने में देरी हो गई, लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पंचनामा और पावती तैयार की। अगले ही दिन, 3 मार्च 2023 को आरोपी रवि शंकर लोढी और मनु केउंट को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसी ने पाया कि आरोपी बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए गांजा की तस्करी में लिप्त थे। दस्तावेजों में शामिल पंचनामा, पावती और रोजनामचा सभी 2 मार्च 2023 की तारीख के हैं। इन दस्तावेजों को रायपुर के आयुक्त कार्यालय, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और मंडल सुरक्षा आयुक्त कार्यालय से सत्यापित किया गया था। अदालत में प्रस्तुत कांड संख्या 3, 4 और 5 के अनुसार, आरोपी ने तस्करी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए, जिनमें मुखबिर की सूचना और तलाशी की प्रक्रिया का विवरण शामिल था। लेकिन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिना तलाशी वारंट के ही पावती तैयार की गई और इसे अदालत में रिकॉर्ड के रूप में पेश किया गया।

हालांकि मामले में गांजा की सटीक मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 8, 20, 27ए और 29 के तहत यह अपराध गंभीर श्रेणी का माना गया। यह कानून नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री, परिवहन और तस्करी पर सख्ती से नियंत्रण रखने के लिए बनाया गया है। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (जालसाजी) के तहत भी आरोप लगे थे, जिसके आधार पर अदालत ने सजा को और कठोर बनाया।
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