
9 साल बाद भी नहीं बना GST Tribunal , कारोबारियों के 3000 से ज्यादा प्रकरण लंबित
रायपुर: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) व्यवस्था लागू हुए 9 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक छत्तीसगढ़ में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना नहीं हो पाई है। इसका नतीजा यह है कि कारोबारियों के 3000 से अधिक विवादित प्रकरण पिछले कई वर्षों से अलग-अलग स्तरों पर लंबित पड़े हुए हैं।

कारोबारियों की मुश्किलें
जिन कारोबारियों ने विवादित जीएसटी प्रकरणों के लिए अपील की थी, उन्हें अब तक न्यायिक मंच ही नहीं मिला। इस वजह से उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
- टैक्स और जुर्माने से जुड़े मामले
- टैक्स चोरी या छापेमारी के बाद की रिकवरी
- ट्रांजेक्शन से संबंधित विवाद
ये सारे मामले उचित मंच न होने से लगातार पेंडिंग हैं। कारोबारियों का कहना है कि इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि समय और धन की बर्बादी भी हो रही है।
ट्रिब्यूनल गठन की कवायद
सरकार द्वारा अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाने की घोषणा काफी समय पहले की जा चुकी थी। योजना के अनुसार इसमें 4 सदस्य होंगे —
- 2 ज्यूडिशियल मेंबर
- 2 टेक्निकल मेंबर
वरिष्ठ ज्यूडिशियल सदस्य इसके अध्यक्ष होंगे और अन्य 3 सदस्य मिलकर कोरम पूरा करेंगे। ट्रिब्यूनल को पूरी तरह से न्यायिक अधिकार दिए जाएंगे ताकि लंबित प्रकरणों की सुनवाई हो सके। नियुक्तियों की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार पर है।

स्थिति और उम्मीद
GST काउंसिल की हालिया 56वीं बैठक में यह तय किया गया कि छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में सितंबर 2025 के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर 2025 के प्रथम सप्ताह तक कारोबारी अपनी अपील इस नए ट्रिब्यूनल में कर सकेंगे।
दिसंबर 2025 से ट्रिब्यूनल का नियमित कामकाज शुरू होने की उम्मीद है। कारोबारी 30 जून 2026 तक जुलाई 2017 से अब तक के सभी मामलों में अपील कर पाएंगे। इससे जहां कारोबारियों को न्याय मिलेगा वहीं सरकार को भी बकाया राजस्व की बड़ी राशि की वसूली होने की संभावना है।
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