
रायपुर की सड़कों से गायब Zebra Crossing और Stop Line वाहन चालक और पैदल यात्री दोनों संकट में
राजधानी रायपुर में यातायात व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर बनी स्टॉप लाइन और ज़ेब्रा क्रॉसिंग पूरी तरह से मिट चुकी हैं, जिसके कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि ट्रैफिक सिग्नल रहते हुए भी लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि रुकना कहाँ है। कई बार वाहन आगे बढ़ जाते हैं और परिणामस्वरूप ई-चालान काटा जाता है।
हादसे का बढ़ा खतरा
ज़ेब्रा क्रॉसिंग मिट जाने से पैदल यात्रियों को सड़क पार करने में बहुत मुश्किल हो रही है। उन्हें तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच रुक-रुक कर सड़क पार करनी पड़ती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो रही है। ट्रैफिक सिग्नल होने के बाद भी चौराहों पर पैदल यात्री अचानक सड़क पार करने लगते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
ई-चालान में सबसे ज्यादा गलत दिशा के वाहन चालक
रायपुर शहर में पिछले आठ महीनों में 1 लाख 61 हजार 188 ई-चालान काटे गए हैं। इनमें ज़्यादातर मामले रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट या तीन सवारी वाले हैं। सबसे ज्यादा मामले गलत दिशा में चलने वाले चालकों के हैं। कुल 72,735 बार ई-चालान सिर्फ रॉन्ग साइड गाड़ी चलाने के लिए काटा गया है।
ट्रैफिक सिग्नल और लेफ्ट टर्न की समस्याएँ
रायपुर शहर में इस समय लगभग 50 ट्रैफिक सिग्नल लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश जगहों पर स्टॉप लाइन बिल्कुल गायब है। वहीं पहले लगाए गए लेफ्ट टर्न पोल भी टूट चुके हैं या हटा दिए गए हैं। इसका परिणाम यह है कि लेफ्ट टर्न पर वाहन खड़े होने लगे हैं, जिससे वाहन जाम की स्थिति बन रही है और पीछे का ट्रैफिक अवरुद्ध हो जाता है।

ट्रैफिक पुलिस और जिम्मेदारी का विवाद
ट्रैफिक डीएसपी सतीश सिंह ने बताया कि स्टॉप लाइन और ज़ेब्रा क्रॉसिंग बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की है। इस विषय पर विभागों को पत्र लिखा जाएगा। फिलहाल स्टॉप लाइन उल्लंघन पर ई-चालान नहीं काटा जा रहा है, लेकिन गलत दिशा, बिना हेलमेट और ओवरलोडिंग मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
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