
BASTAR AIRPORT : तीन लाख से अधिक यात्रियों ने की हवाई यात्रा
जगदलपुर : बस्तर के लिए अब हवाई यात्रा किसी सपने जैसी नहीं रही। जगदलपुर एयरपोर्ट से अब तक लगभग तीन लाख यात्रियों ने उड़ान भरी है। इस सुविधा ने आदिवासी अंचल वाले इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से तेज़ी से जोड़ दिया है और विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

जगदलपुर एयरपोर्ट से शुरू में एलायंस एयर ने रायपुर और हैदराबाद मार्ग पर उड़ानें संचालित कीं। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए बाद में दिल्ली, जबलपुर और बिलासपुर जैसे प्रमुख मार्ग भी जोड़े गए। हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस ने रायपुर और हैदराबाद के लिए दैनिक उड़ानें शुरू कीं, जिससे यात्रियों को और अधिक सुविधा मिलने लगी। इसके अलावा पैरामिलिट्री बलों की सुविधा के लिए दिल्ली मार्ग पर विशेष सेवा संचालित की जा रही है।
पहले जगदलपुर से रायपुर और हैदराबाद पहुँचने में 8 से 12 घंटे का समय लगता था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी सड़क यात्रा से लोग परेशान रहते थे। अब यह दूरी महज एक घंटे की हवाई यात्रा में पूरी हो जाती है, जिससे लोगों का समय और ऊर्जा दोनों बच रहे हैं।
हवाई सेवाओं से व्यापार को बड़ी मदद मिली है। बस्तर क्षेत्र के बांस शिल्प, हस्तशिल्प और लघु वनोपज अब राष्ट्रीय बाज़ार तक बड़ी आसानी से पहुँचने लगे हैं। इसी तरह पर्यटन भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थल, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर अब देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए सुगम हो गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन भी उल्लेखनीय है। अब छात्र बड़े शहरों के शैक्षणिक संस्थानों तक आसानी से पहुँच पा रहे हैं, वहीं गंभीर स्थितियों में मरीजों को तुरंत रायपुर, हैदराबाद या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में बेहतर उपचार के लिए ले जाना संभव हुआ है।

जगदलपुर एयरपोर्ट की उपलब्धियाँ केवल परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसने बस्तर की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को भी गति दी है। पर्यटन बढ़ने से होटल और रेस्तरां इंडस्ट्री में उछाल आया है, जबकि एयरपोर्ट संचालन से जुड़े प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। उद्योग और निवेश की संभावनाएँ भी तेज़ी से बन रही हैं।
भविष्य की दृष्टि से विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जगदलपुर एयरपोर्ट को मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों से भी जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और भी मज़बूत स्थान बना सकता है। साथ ही यदि एयर कार्गो सेवाएं शुरू होती हैं तो बस्तर के वनोपज और हस्तशिल्प को वैश्विक बाज़ार में पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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