
Raipur: आवारा कुत्तों का आतंक, दो साल की मासूम पर हमला, सिर से नोचा मांस
रायपुर, 08 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और इसके आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीरगांव के गाजी नगर वार्ड क्रमांक 29 में शनिवार शाम एक दिल दहलाने वाली घटना हुई, जिसमें आधा दर्जन आवारा कुत्तों ने दो साल की मासूम बच्ची अनाया पर हमला कर दिया। इस हमले में बच्ची के सिर, हाथ और गाल पर गंभीर चोटें आईं, और सिर से दो जगह मांस का लोथड़ा निकल गया। बच्ची को तत्काल डीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गुलाम मुस्तफा, जो ऑटो चालक हैं, अपने परिवार के साथ बीरगांव के गाजी नगर वार्ड क्रमांक 29 में रहते हैं। शनिवार शाम करीब 5 बजे उनकी दो साल की बेटी अनाया घर के बाहर गली में खेल रही थी। तभी अचानक आधा दर्जन आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्ची के सिर, गाल और हाथ पर गहरे घाव किए। बच्ची के सिर से दो जगह मांस निकल गया, और उसके शरीर पर पांच जगह कुत्तों के दांत और नाखून के निशान पाए गए। बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े और कुत्तों को भगाकर उसे बचाया।

अस्पताल में चल रहा इलाज, सर्जरी की जरूरत
मासूम अनाया को तुरंत डीकेएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है। बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है, और वह दर्द से तड़प रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के सिर की दो जगह सर्जरी करनी पड़ेगी, क्योंकि वहां मांस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
बीरगांव में आवारा कुत्तों का आतंक
बीरगांव के रहवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि रात के समय लोग अकेले सड़कों पर निकलने से डरते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुत्ते रात में सड़कों पर झुंड बनाकर घूमते हैं और लोगों को घेर लेते हैं, जिससे बचना मुश्किल हो जाता है। यह समस्या केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बीरगांव में फैली हुई है।
रोजाना 10-15 लोग बन रहे शिकार
बीरगांव में आवारा कुत्तों की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि रोजाना 10 से 15 लोग उनके हमले का शिकार बन रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बीरगांव नगर निगम के पास कुत्तों को पकड़ने या उनकी नसबंदी करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा, कुत्तों के काटने के बाद जरूरी रेबीज रोधी इंजेक्शन भी स्थानीय सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम का बयान
बीरगांव नगर निगम के कमिश्नर युगल किशोर उर्वाशा ने कहा, “हमारे पास कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई संसाधन नहीं हैं, लेकिन यह घटना बेहद गंभीर है। हम जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर जल्द से जल्द इसका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।”
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