
EWS Certificate फर्जीवाड़ा, MD-MS Counselling के पहले Report अधूरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्रों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, खासकर एमडी-एमएस मेडिकल प्रवेश को लेकर।

सिम्स बिलासपुर में एमबीबीएस छात्रा का ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जाँच में फर्जी पाया गया है, जिसमें हस्ताक्षर और सील अलग-अलग मिली। तहसील कार्यालय ने भी पुष्टि की कि यह प्रमाण पत्र उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है.
रिपोर्ट अधूरी, काउंसलिंग शुरू
इस माह प्रदेश में एमडी-एमएस में प्रवेश के लिए काउंसलिंग शुरू हो रही है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों की सर्टिफिकेट जांच रिपोर्ट अब तक पूरी नहीं हो पाई है. पिछले साल छात्रों ने पीएमओ में फर्जीवाड़े की शिकायत की थी, जिसके बाद ही जाँच शुरू हुई थी। नेहरू मेडिकल कॉलेज व सिम्स बिलासपुर में ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के आधार पर महत्वपूर्ण मेडिकल सीटें मिल गई थीं।
वैध या पात्र, दोनों में भ्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, एक छात्रा के सर्टिफिकेट को तहसीलदार ने वैध बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि वह वास्तव में EWS श्रेणी के लिए पात्र हैं या नहीं। सही पात्रता की पुष्टि के लिए छात्रों की आय का सत्यापन जरूरी है, क्योंकि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आने के लिए वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. अक्सर अधिकारी केवल यह जांचते हैं कि सर्टिफिकेट कार्यालय ने जारी किया या नहीं, आय की जांच करना जरूरी नहीं समझा जाता।

करोड़पति भी बन रहे ‘गरीब सवर्ण’
मामले की जांच के दौरान कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां संपन्न छात्र फर्जी तरीके से EWS प्रमाण-पत्र बनवा कर मेडिकल सीट पर दाखिला ले रहे हैं। पिछले साल डीन ने चार जिलों के कलेक्टर को अति आवश्यक केस बताते हुए ईडब्ल्यूएस जांच का पत्र लिखा था, लेकिन जांच प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है.
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



